लेखा-जोखा.जमीन पर नहीं उतर सकीं कई योजनाएं
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :30 Dec 2016 7:56 AM
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गया: यह साल नगर निगम के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. कुछ योजनाएं पूरी हुईं, तो कई वेटिंग लिस्ट में रह गयीं. हालांकि बोर्ड से पारित योजनाओं में कई को प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलने के बाद भी काम शुरू कर दिया गया है. निकाय चुनाव नजदीक होने के कारण पार्षद अपने लाभ को देख योजना […]
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गया: यह साल नगर निगम के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. कुछ योजनाएं पूरी हुईं, तो कई वेटिंग लिस्ट में रह गयीं. हालांकि बोर्ड से पारित योजनाओं में कई को प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलने के बाद भी काम शुरू कर दिया गया है. निकाय चुनाव नजदीक होने के कारण पार्षद अपने लाभ को देख योजना पूरा कराने पर जोर दे रहे हैं. कई योजनाएं इसलिए लटक गयी कि कई पार्षद आरक्षण समीकरण के फेरबदल में दूसरे विकल्प की तलाश में लग गये.
इन योजनाआें को लगा ग्रहण : बॉटम, नादरागंज, मनसरवा व कुजापी नाला आदि प्रमुख हैं. इसके अलावा करसिल्ली जलमीनार बन जाने के बाद भी पाइप लाइन विस्तार पूरा नहीं हो सका. बॉटम नाला 1.13 करोड़, नादरागंज नाला तीन करोड़ व कुजापी नाला भी लगभग तीन करोड़ रुपये का है. सभी में आरसीसी नाला निर्माण कराया जाना है. बरसात के दिनों में तीनों नालों के कारण कई मुहल्लों में जलजमाव की स्थिति बनी रहती है. बॉटम नाले के कारण निर्माण लागत से अधिक रुपये इनके कारण होने वाली समस्याओं से लोगों को निजात दिलाने में बहा दिये गये. करसिल्ली जलमीनार की पूरी योजना का एस्टिमेट 98 करोड़ बताया गया था. योजना जब पूरी होने पर हुईं, तो पाइप ही घट गये. इसके बाद 23 लाख रुपये का प्रस्ताव बोर्ड से पाइप के लिए पारित किया गया. काम इस वर्ष नहीं पूरा हो सका. कुजापी व नादरागंज नाले की टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा रही है. कई साल से सम्राट अशोक भवन का प्रस्ताव भी इसी साल पारित किया गया. फाइल में ही योजना दौड़ रही है.
बोर्ड के विरोध में लिया गया निर्णय : पांच मार्च को बोर्ड की बैठक में वार्ड पार्षद चितरंजन वर्मा व ब्रजभूषण प्रसाद ने प्रस्ताव लाया था कि सहायक अवध किशोर प्रसाद व हरेराम राय द्वारा अपने-अपने वार्ड में होल्डिंग टैक्स वसूली में काफी अनियमितता बरती गयी है. बैठक में दोनों पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था. मामला कुछ दिन दबाये रखा गया. इसके बाद दोनों पर प्राथमिकी दर्ज किये बगैर ही प्रपत्र क का गठन कर विभागीय जांच शुरू कर दी गयी. इसमें सहायक अभियंता सह संचालन पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिन्हा ने आरोपित कर संग्रहक सह सहायक अपने पास रखे होल्डिंग टैक्स की राशि निगम कोष में जमा कर दिये जाने के बाद उन्हें चेतावनी देते हुए निलंबन मुक्त करने की अनुशंसा कर दी गयी. इसके बाद नगर आयुक्त विजय कुमार ने 16 नवंबर को दोनों को निलंबनमुक्त कर दिया. मेयर सोनी कुमारी का कहना है कि इस संबंध में दोबारा किसी तरह का प्रस्ताव बोर्ड में नहीं लाया गया. इधर कानूनविद अधिवक्ता कैसर सैफुद्दीन ने राय देते हुए कहा कि बोर्ड के फैसले के बाद दोनों पर एफआइआर दर्ज होनी चाहिए थी. पुलिस जांच में जो निष्कर्ष आता, उसपर फैसला लेना चाहिए था. इधर अधिवक्ता विनोद कुमार कहते हैं कि दोनों पर बोर्ड ने विचार के बाद ही एफआइआर दर्ज करने का निर्णय लिया होगा. इसलिए हर हाल में मुकदमा दर्ज कर, दोनों के पक्ष-विपक्ष में किसी तरह का फैसला लिया जाना चाहिए था. इसके अलावा दो कमीशन एजेंट का हटाने का निर्णय बोर्ड में लिया गया. इस मामले में राज्य सूचना आयोग को निगम ने 25 हजार जुर्माना भी दिया. मामला आया गया हो गया.
विवादों में रहा क्रय समिति का फैसला
हाल के दिनों में नगर निगम क्रय समिति के सामान खरीद के फैसले काफी विवादों में रहे. इसमें हाइ डिस्चार्ज मशीन व शव वाहन खरीद का मामला काफी चर्चित रहा. हाइ डिस्चार्ज मशीन 16.71 लाख रुपये व शव वाहन 16 लाख रुपये में खरीदने का निर्णय क्रय समिति ने लिया. हाइ डिस्चार्ज मशीन की खरीद बाजार की कीमत से अधिक दाम पर करने के मामले में किरकिरी होता देख, नगर आयुक्त ने कमेटी का गठन कर जांच का आदेश दे दिया. इधर, पुराने शव वाहन का रंग-रोगन कर निगम में पहुंचा दिया गया. 14 दिसंबर को निगम स्टोर ने वाहन रिसीव भी कर लिया. मामला सुर्खियों में आया, तो मेयर व नगर आयुक्त ने जांच कराने की बात कही. इससे पहले फॉगिंग मशीन व डस्टबीन खरीद में भी गड़बड़ी का आरोप लग चुका है. नगर निगम की विकास शाखा (पुराना जीआरडीए कार्यालय) के ग्राउंड में कई सामान खुले में रखे रहने के कारण खराब हो रहे हैं. इनमें ट्रेक्टर, डस्टबीन, चलंत शौचालय व अन्य कई संसाधन हैं. नये ट्रेक्टर से सामान खोल कर पुराने ट्रेक्टर में लगाये जा रहे हैं. पुराने ट्रेक्टर की मरम्मत के पर किसी का ध्यान नहीं है.
योजनाओं पर काम करने के लिए विभागीय कार्रवाई पूरी कर स्वीकृति के लिए फाइलें सरकार के पास भेजी गयीं. इन योजनाओं का टेंडर तीन बार निकाला गया है. विभागीय अड़चन के कारण काम शुरू नहीं हो सका. योजनाओं के शुरू नहीं होने का सबसे बड़ा कारण है कि 50 लाख रुपये से ऊपर की योजनाओं की स्वीकृति नगर विकास विभाग से लेनी होती है. इसमें कई योजनाएं विभाग के पास वर्षों से लंबित हैं. इस वर्ष निगम की ओर से शहर में कूड़ा उठाव के लिए टेंपो लगाया गया है. इसके अलावा 40 साल बाद शहर के उत्तरी इलाके में पाइप लाइन से वाटर सप्लाइ दी जा रही है. ड्राइ जोन इलाकाें में दंडीबाग से वाटर सप्लाइ सुचारु करने के लिए निगम ने अपनी पूरी ताकत लगा दी और इसमें सफलता हासिल की.
सोनी कुमारी, मेयर
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