अचानक आ धमकी पुलिस, तब जाना बेटे ने किया क्राइम : मनाेरमा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 May 2016 9:33 AM

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गया: शनिवार की रात अचानक गया स्थित मकान में पुलिस आ धमकी. पुलिस ने पहले रॉकी व मेरे बॉडीगार्ड की खाेज की. फिर गाड़ी के बारे में पूछा. मैं बाहर आयी, तो देखा कि रामपुर थाने की पुलिस आयी है. पूछने पर बताया गया कि आपके बेटा रॉकी व बॉडीगार्ड राजेश कुमार ने किसी काे […]

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गया: शनिवार की रात अचानक गया स्थित मकान में पुलिस आ धमकी. पुलिस ने पहले रॉकी व मेरे बॉडीगार्ड की खाेज की. फिर गाड़ी के बारे में पूछा. मैं बाहर आयी, तो देखा कि रामपुर थाने की पुलिस आयी है. पूछने पर बताया गया कि आपके बेटा रॉकी व बॉडीगार्ड राजेश कुमार ने किसी काे गाेली मार दी है. मैं हक्का-बक्का रह गयी. चूंकि, बाेधगया दाेमुहान पर अपने खेत से गेहूं लाने अंगरक्षक के साथ दाे गाड़ी से गयी थी.

एक गाड़ी में भी साथ था. उधर से आते समय गेहूं के बाेरे लदे हाेने की वजह से अंगरक्षक काे बेटे के साथ गाड़ी में बैठ जाने काे कहा. मैं अनाज लेकर चली आयी. इसी बीच न जाने कैसे रास्ते में यह सब सारा खेल हाे गया. ये बातें आदित्य सचदेवा हत्याकांड के आरोपित रॉकी यादव की मां विधान पार्षद मनाेरमा देवी ने फाेन पर बातचीत के दौरान कहीं. उनके पति बिंदी यादव भी घर पर ही थे. उन्हें भी कोई जानकारी नहीं थी. पुलिस ने जब कहा कि बिंदी यादव कहां, ताे घर पर हाेने की जानकारी दी. उन्हें बुलाया और गाड़ी पर बैठा कर ले जाने लगे, ताे मैंने पूछा इनकाे क्याें ले जा रहे हैं. उनका जवाब था रॉकी यादव की गिरफ्तारी में पुलिस का सहयाेग करने के लिए ले जा रहा हूं. भेज दिया जायेगा. विधान पार्षद ने कहा कि राजनीतिक षड्यंत्र का हमेशा शिकार हाेना पड़ता है. अब कर भी क्या सकती. राजनीति में हूं, ताे सब सहना भी पड़ता है. उन्हाेंने आदित्य सचदेवा हत्याकांड की निंदा की आैर कहा कि उन्हें उसके परिवार के प्रति संवेदना है, जिसके मां का बच्चा मारा गया. मेरा बेटा अगर दाेषी है, तो उसे कानून सजा देगी. वह जरूर पुलिस के सामने पेश हाेगा.

उन्हाेंने बताया कि बिंदी यादव से उनकी शादी 1989 में हुई थी. वह एमए पास हैं. वहीं, पति स्नातक की डिग्री लिये हुए हैं. उनका पैतृक घर माेहनपुर प्रखंड की इटवां पंचायत के गणेशचक गांव में है. फिलहाल, वह शहर के एपी कॉलाेनी में परिवार के साथ रहती हैं. 2001 में पहली बार पंचायत समिति का चुनाव जीतकर माेहनपुर प्रखंड से प्रमुख बनी थीं. फिर जुलाई 2003 में राजद के टिकट पर विधान पार्षद चुनी गयीं. 2009 तक विधान पार्षद रहीं. दूसरी बार जदयू की टिकट पर चुनाव लड़ रहे अनुज कुमार सिंह से वह हार गयीं व फिर 15 जून, 2015 में वह दूसरी बार जदयू की टिकट पर विधान परिषद सदस्य के लिए चुन ली गयीं. भाजपा से चुनाव लड़ रहे अनुज कुमार सिंह इस बार हार गये. उनके पति 2005 में मुफस्सिल विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय व 2010 में गुरुआ विधानसभा क्षेत्र से राजद की टिकट पर चुनाव लड़े, पर हार गये. 2001 में बिंदी यादव जिला पर्षद सदस्य का चुनाव जीत कर जिला पर्षद के अध्यक्ष बने थे. उनके दाे बेटे व एक बेटी है. बड़ा बेटा रॉकी है, जाे एमए पास है. वह बीपीएससी की तैयारी कर रहा है. दूसरा बेटा लंदन में रह कर एमबीए कर रहा है व बेटी भी दिल्ली में रह कर एमबीए कर रही है.

मनाेरमा देवी ने बताया कि पहली बार जब वह विधान पार्षद चुनी गयी थीं, ताे सर्टिफिकेट में कम उम्र बताने का आरोप लगाया गया था. विधान पार्षद के लिए 30 साल का हाेना आवश्यक है. वाेटर लिस्ट व सर्टिफिकेट में उम्र का अंतर था. लेकिन, चुनाव ताे वाेटर लिस्ट में उम्र के हिसाब से लड़े थे आैर उसमें ठीक था. फिर सर्टिफिकेट में भी उम्र सुधरवाया गया था. उनकी सदस्यता बरकरार रह गयी थी. रॉकी कहां, यह उन्हें नहीं पता. पर, वह जहां भी है, विश्वास है कि जल्द ही कानून के सामने पेश हाेगा. अगर, मेरा बेटा दाेषी पाया गया, ताे कानून अपना काम करेगी. उसका इससे पहले का काेई आपराधिक रिकार्ड नहीं है.

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