मोतिहारी पुलिस ने जालसाज को छोड़ा

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मोतिहारी पुलिस ने जालसाज को छोड़ासत्यदेव गुप्ता पर सिविल लाइन थाने में करोड़ों रुपये के गबन का मामला है दर्ज गया पुलिस के पहुंचने से पहले तबीयत खराब होने पर पीआर बांड भरवा कर सत्यदेव को छोड़ा संवाददाता, मोतिहारी/गयापुलिस के पास काफी पावर है. वह किसी को भी पकड़ कर जेल भेज सकती है और […]

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मोतिहारी पुलिस ने जालसाज को छोड़ासत्यदेव गुप्ता पर सिविल लाइन थाने में करोड़ों रुपये के गबन का मामला है दर्ज गया पुलिस के पहुंचने से पहले तबीयत खराब होने पर पीआर बांड भरवा कर सत्यदेव को छोड़ा संवाददाता, मोतिहारी/गयापुलिस के पास काफी पावर है. वह किसी को भी पकड़ कर जेल भेज सकती है और चाहे तो आरोपितों को छोड़ भी सकती है. यह उसके मिजाज पर निर्भर करता है. पुलिस का यह पावर केसरिया में गिरफ्तार गया जिले के वांटेड सत्यदेव गुप्ता मामले में दिखा. मोतिहारी पुलिस ने पहले तो करोड़ों के जालसाज सत्यदेव गुप्ता को गिरफ्तार किया और फिर यह कहते हुए पीआर बांड पर छोड़ दिया कि उसके खिलाफ मोतिहारी में कोई वांरट नहीं है. गौरतलब है कि सत्यदेव गुप्ता पर गया शहर के सिविल लाइन थाने में करोड़ों रुपये के गबन का मामला दर्ज है. माेतिहारी पुलिस ने सत्येदव की गया पुलिस को गिरफ्तारी की सूचना दी गयी थी. गया पुलिस जब तक मोतिहारी पहुंचती, इससे पहले गिरफ्तार सत्यदेव की तबीयत अचानक खराब हो गयी. उन्हें मोतिहारी सदर अस्पताल में भरती कराया गया. गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए सत्यदेव को पीआर बॉड पर छोड़ दिया गया. मोतिहारी पुलिस का कहना है कि बिना किसी वारंट के पकड़े गये 78 वर्षीय सत्येदव गुप्ता की पुलिस कस्टडी में अगर मौत हो जाती, तो जबाव कौन देता. उन्हें तो कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है. मोतिहारी पुलिस का यह अपना तर्क है, लेकिन चिटफंड कंपनी खोल कर मेहनतकश लोगों के करोड़ों रुपये गबन करनेवाले सत्यदेव प्रसाद गुप्ता की गिरफ्तारी, फिर पीआर बॉड पर छोड़ने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. लोगों का कहना है कि पुलिस के पास पावर है. वह चाहे तो किसी को पकड़ कर जेल भेज दे या फिर चाहे तो आरोपित को भी छोड़ दे. हालांकि, इस पूरे प्रकरण में मोतिहारी पुलिस ने एक नहीं, कई जगहों पर अपने पावर का गलत इस्तेमाल किया है. पुलिस के पास अगर वारंट नहीं था, तो सत्यदेव गिरफ्तार ही नहीं करना चाहिए था. अगर गिरफ्तार भी किया, तो गया पुलिस के आने का इंतजार करना चाहिए था. उन्हें पुलिस ने सत्यदेव को गिरफ्तार कर बीमार होने पर अस्पताल में भरती कराया भी, तो उसे बिना अस्पताल से डिस्चार्ज कराये हुए अपने साथ नहीं ले जाना चाहिए था. अस्पताल ने किया मरीज को भगोड़ा घोषित केसरिया थाने की पुलिस कस्टडी में तबीयत खराब होने पर सत्येदव प्रसाद गुप्ता को आठ बजे रात में स्थानीय पीएचसी में भरती कराया गया. वहां से पुलिस मोतिहारी सदर अस्पताल ले गयी. सदर अस्पताल में डॉ सौरभ ने रात 10:50 बजे उनको भरती किया. मंगलवार की सुबह में स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीज को बेड पर नहीं देखा, तो छानबीन शुरू हुई. पता चला कि पुलिसवालों के साथ पांच-छह लोग आये थे, जो मरीज (सत्यदेव) को अपने साथ लेकर चले गये. यह जानकारी मिलने के बाद सर्जिकल वार्ड के कर्मचारियों ने मरीज के बीएचटी पर लामा (बिना डिस्चार्ज के फरार होना) लिख दिया. सूचना देने पर भी नहीं पहुंची गया पुलिसमोतिहारी एसपी जितेंद्र राणा ने बताया कि सत्यदेव प्रसाद गुप्ता को थाना पर रोक कर रखा गया था. उसके खिलाफ मोतिहारी में कोई वारंट नहीं था. ऐसी सूचना मिली थी कि गया में उसके खिलाफ मामला दर्ज है. सूचना दी गयी थी, लेकिन गया पुलिस नहीं पहुंची. इस कारण उसे पीआर बांड पर छोड़ दिया गया.गया पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपित को छोड़ाएसएसपी गरिमा मलिक ने कहा कि सत्यदेव गुप्ता की गिरफ्तारी की सूचना पर पुलिस की टीम मोतिहारी गयी थी. लेकिन, गया पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपित की तबीयत अचानक खराब हो गयी. इस कारण मोतिहारी पुलिस ने उसे पीआर बांड पर छोड़ दिया. उस पर सिविल लाइन थाने में करोड़ों रुपये के गबन का मामला दर्ज है. उन्होंने कहा कि तबीयत ठीक होने के बाद सत्यदेव गुप्ता को गिरफ्तार किया जायेगा. अगर वे फिर भाग जाते है, तो पीआर बांड भरनेवालों पर कानूनी कार्रवाई होगी.

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