स्वामीजी को मृत्यु का आभास हो गया था

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स्वामीजी को मृत्यु का आभास हो गया थास्मृति शेष परम श्रद्धेय स्वामी राघवाचार्यजी को मैंने बड़े करीब से देखा, जाना है. बात उन दिनों की है जब मेरे पति स्व शिवराम डालमिया की स्थिति बड़ी खराब थी. उस समय स्वामीजी हमारे घर पर ही थे. उनके करीब बैठे थे. स्वामीजी की सलाह पर कष्ट निवारण […]

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स्वामीजी को मृत्यु का आभास हो गया थास्मृति शेष परम श्रद्धेय स्वामी राघवाचार्यजी को मैंने बड़े करीब से देखा, जाना है. बात उन दिनों की है जब मेरे पति स्व शिवराम डालमिया की स्थिति बड़ी खराब थी. उस समय स्वामीजी हमारे घर पर ही थे. उनके करीब बैठे थे. स्वामीजी की सलाह पर कष्ट निवारण के लिए मंत्र-जाप चल रहा था. स्वामीजी ने उनके (स्व डालमिया) शरीर पर कुछ भभूति लगाया और परिवार के सदस्याें को धैर्य बंधाते हुए कहा कि अब ये रुकनेवाले नहीं हैं. आप लोगों को साहस व धैर्य से काम लेना होगा. इस पर परिवार के सदस्य भाव विह्वल हो गये. कुछ ही देर बाद मेरे पति के मुख मंडल पर तेज जैसा कुछ दिखा. स्वामीजी ने कहा कि अब समय आ गया है. बस यही वह समय था, जब उन्होंने अंतिम सांस ली. तत्पश्चात, स्वामीजी की देखरेख में ही विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया गया.अभी हाल ही की बात है. मेरे पति का बैकुंठोत्सव था. स्वामीजी बीमार हो गये. डॉ एएन राय व अन्य डॉक्टरों ने उन्हें एम्स में भरती कराया. एक शाम स्वामीजी की हालत बड़ी नाजुक हो गयी. डॉक्टरों ने कहा कि आज की रात काफी कठिन है. खैर, किसी प्रकार रात कटी. सबेरे-सबेरे मैं उनसे मिलने अस्पताल पहुंची. स्वामीजी ने मुझे देखते ही बोला, ‘रात में ईश्वर से साक्षात् हुआ. अभी मेरा मार्ग नहीं खुला है. मैं अभी नहीं जाऊंगा. शिवराम बाबू के बैकुंठोत्सव के बाद ही जाऊंगा’. वह उस कार्यक्रम में आये. बैकुंठोत्सव के पहले व आखिरी दिन उनका आशीर्वाद मिला. इसके बाद वह फिर बीमार पड़ गये. मैं उनसे मिलने उनके आश्रम पहुंची. इस बार स्वामीजी ने कहा कि मेरा आखिरी वक्त आ गया है. मैं अब रुकनेवाला नहीं. इस बार वह दिल्ली गये और वहीं उन्होंने प्राण त्याग दिया. स्वामी राघवाचार्यजी हमारे परिवार के लिए एक संरक्षक के रूप में थे. हमलोगों से बराबर कहा करते थे कि पितृपक्ष के अवसर पर यात्रियों के लिए वैसी ही व्यवस्था करें, जैसी व्यवस्था शिवराम बाबू करते थे. वह हमारे यहां सभी मौके पर मौजूद रहते थे. उनके बैकुंठवास से जो क्षति हुई है, वह निस्संदेह अपूरणीय है. -उषा डालमिया\\\\B

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