दो डॉक्टरों की सेवा समाप्त

By Prabhat Khabar Digital Desk
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गया: अनुमंडलीय अस्पताल में संविदा पर नियुक्त डॉ नर्वदेश्वर प्रसाद सिन्हा व डॉ सुरेंद्र प्रसाद की सेवा (कांट्रैक्ट) समाप्त कर दी गयी है. इन दोनों डॉक्टरों पर सरकारी आदेशों की अवहेलना कर मनमाने ढंग से कार्य करने व स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करने का आरोप लगा है. पीड़ित डॉक्टरों की मानें, तो हकीकत कुछ और ही है. सभी आरोप गलत हैं. इस बाबत डीएम सह जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष से न्याय की गुहार भी लगायी है.

सिविल सजर्न सह जिला स्वास्थ्य समिति के सचिव द्वारा जारी आदेश पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सरकारी आदेशों की अवहेलना कर मनमाने ढंग से कार्य करने व स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करने का आरोप में डॉ नर्वदेश्वर प्रसाद सिन्हा व डॉ सुरेंद्र प्रसाद की सेवा समाप्त की जाती है. ज्ञातव्य है कि ये दोनों डॉक्टर मूल रूप से अनुमंडलीय अस्पताल टिकारी में पदस्थापित थे. फिलहाल, डॉ नर्वदेश्वर प्रसाद सिन्हा जिला यक्ष्मा केंद्र, गया में व डॉ सुरेंद्र प्रसाद जयप्रकाश नारायण अस्पताल में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे. दोनों की सेवा संतोषजनक रही है. बावजूद जिला स्वास्थ्य समिति के सचिव सह सिविल सजर्न के पत्रंक 577, दिनांक 17.6.2014 द्वारा दोनों डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति रद्द कर दी गयी. आदेश पत्र में दो दिनों के अंदर मूल पदस्थापित स्थान पर योगदान सुनिश्चित करने को कहा गया है. पुन: 12 जुलाई को स्मार पत्र (ज्ञापांक 685) जारी कर चेतावनी दी गयी कि अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया है. पुन: दो दिनों के अंदर योगदान देने का आदेश दिया जाता है, अन्यथा संविदा (कांट्रैक्ट) समाप्त कर दी जायेगी. फिर 17 जुलाई को आदेश (ज्ञापांक 706) जारी कर संविदा समाप्त कर दी गयी. इसमें डॉ सिन्हा पर योगदान नहीं करने व डॉ प्रसाद पर बगैर सूचना के मुख्यालय से अनुपस्थित रहने का आरोप है.

इस बाबत डॉ सिन्हा ने डीएम से न्याय की गुहार लगायी है. डीएम को लिखे गये पत्र में उन्होंने कहा है कि अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह जिला यक्ष्मा पदाधिकारी के ज्ञापांक 129, दिनांक 21.7.2014 द्वारा उन्हें टिकारी के लिए विरमित किया गया और उन्होंने 22 जुलाई को वहां योगदान कर ओपीडी में काम भी किया. लेकिन, 24 जुलाई को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने मौखिक रूप से यह कह कर ड्यूटी करने से मना कर दिया कि उनकी संविदा समाप्त हो गयी है.

इसी प्रकार डॉ प्रसाद ने बताया कि जयप्रकाश नारायण अस्पताल से उन्हें 25 जून को विरमित किया गया और 26 जून को उन्होंने अनुमंडलीय अस्पताल टिकारी में योगदान किया. इस बीच उनकी तबीयत बिगड़ गयी और अस्पताल उपाधीक्षक को छुट्टी आवेदन देकर वह हर्ट का इलाज कराने बेंगलुरु चले गये. इस प्रकार संविदा समाप्त किये जाने पर सवाल खड़ा किया जाना स्वाभाविक है.

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