बाप-रे ! जनता के 84 लाख रुपये का कोई मोल नहीं
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Sep 2018 5:03 AM
गया : स्वास्थ्य विभाग के जिला व राज्यस्तर के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से पब्लिक के लाखों रुपये बर्बाद हो गये. सांसद फंड से छह साल पहले मिले दो चलंत चिकित्सा वाहन यूं ही बेकार पड़े हैं, जबकि ये अब तक के सबसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस हैं. 2012 में सांसद हरि मांझी […]
गया : स्वास्थ्य विभाग के जिला व राज्यस्तर के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से पब्लिक के लाखों रुपये बर्बाद हो गये. सांसद फंड से छह साल पहले मिले दो चलंत चिकित्सा वाहन यूं ही बेकार पड़े हैं, जबकि ये अब तक के सबसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस हैं. 2012 में सांसद हरि मांझी ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत 42-42 लाख रुपये के दो चलंत चिकित्सालय जिले को मुहैया कराये थे. इसमें ऑपरेशन करने की भी व्यवस्था थी. शौचालय तक की सुविधा दी गयी थी. इसका प्रयोग केवल मरीजों को अस्पताल तक लाना नहीं, बल्कि गंभीर रूप से घायल मरीजों का इलाज करना भी था.
किसी दुर्घटना के बाद घायल को अगर तुरंत ट्रीटमेंट की जरूरत हुई, तो चलंत चिकित्सालय में ही शुरू किया जा सकता था. इसके अलावा किसी ग्रामीण इलाके में स्वास्थ्य सेवा देने के लिए भी चिकित्सकों की टीम इसका प्रयोग कर सकती थी. कुल मिला कर ये वाहन जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को अपग्रेड करने में सहायक साबित होते. लेेकिन, यह अफसोस और शर्म की बात है कि यहां के अधिकारियों ने इन वाहनों को पब्लिक के उपयोग के लायक नहीं बनाया.
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