रैन बसेरों की हालत तबेले जैसी ! नहीं होती है मॉनीटरिंग पेयजल, खाना व चिकित्सा सब कुछ गायब

Updated at : 12 Aug 2018 5:01 AM (IST)
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रैन बसेरों की हालत तबेले जैसी ! नहीं होती है मॉनीटरिंग  पेयजल, खाना व चिकित्सा सब कुछ  गायब

गया : गरीबों के लिए फाइव स्टार होटल के रूप में प्रचारित किये जानेवाले शहर में चार जगहों पर चल रहे रैन बसेरे ने अब तबेले का रूप ले लिया है. यहां पीने का पानी, चिकित्सा सुविधा व खाने की व्यवस्था सब कुछ नदारद है. बताया जाता है कि शहर में गांधी मैदान के पास […]

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गया : गरीबों के लिए फाइव स्टार होटल के रूप में प्रचारित किये जानेवाले शहर में चार जगहों पर चल रहे रैन बसेरे ने अब तबेले का रूप ले लिया है. यहां पीने का पानी, चिकित्सा सुविधा व खाने की व्यवस्था सब कुछ नदारद है. बताया जाता है कि शहर में गांधी मैदान के पास तीन व पंचायती अखाड़ा में एक रैन बसेरा 2016 में चालू किया गया था. चालू करते वक्त निगम के अधिकारियों ने प्रचारित करवाया था कि यहां पर गरीबों को मुफ्त में फाइव स्टार होटलवाली सुविधा दी जायेगी.

यहां सस्ते दर पर भोजन, टीवी, पंखा, एसी व शुद्ध पेयजल की सुविधा लोगों को उपलब्ध करायी जायेगी. चारों जगहों पर बेड, पंखा व टीवी की व्यवस्था देकर रैन बसेरा शुरू कर दिया गया. दो वर्ष बीतने के बाद भी सुविधाएं बढ़ायी तो नहीं जा सकीं, उलटे दी गयी सुविधाओं में भी कमी हो गयी है. खाने की व्यवस्था अब तक नहीं की जा सकी है, जबकि यहां रसोई घर बना कर 30 रुपये में खाना देना था. डॉक्टरी सुविधा के नाम पर यहां के प्रबंधक ही लोगों को दवा दे देते हैं. इस संबंध में रैन बसेरा के एक प्रबंधक ने बताया कि माह में एक हजार रुपये की दवा खरीद कर दी जाती है. अंदाज से ही जरूरतमंद लोगों को दवा दे दी जाती है.

नहीं हो सका प्रचार : प्रचार के अभाव में लोगों का जुड़ाव रैन बसेरा से नहीं हो सका है. यहां दो वर्षों में दो हजार लोग ही ठहरने के लिए पहुंचे हैं. दो-दो केयर टेकर व एक-एक प्रबंधक बहाल हैं. यहां अधिकतर लोग वही होते हैं, जो यहां कई दिनों तक ठहर कर कामकाज करते हैं. गांधी मैदान के एक रैन बसेरा में पहुंचने पर पता चला कि यहां रात से ठहरे एक व्यक्ति का अब तक पहचान पत्र लेना तो दूर रजिस्टर में इंट्री भी नहीं दिखाया गया है.
इनके जिम्मे है रैन बसेरे का देखरेख
शहर में महिला स्वयं सहायता समूह की एरिया लेबल फेडरेशन विंग द्वारा रैन बसेरे को चलाया जाता है. निगम सूत्रों का कहना है कि इनके प्रभारी ने अब तक किसी तरह की रिपोर्ट नहीं दी है. किसी चीज की कमी होने पर फेडरेशन के प्रभारी को ही निगम के अधिकारी को जानकारी देनी होती है. सूत्रों का यह भी कहना है कि बैठक में अब तक सब कुछ सही होने की ही रिपोर्ट दी गयी है. कई जगह रैन बसेरा में छत से पानी टपकता है. आरओ भी खराब है. यहां के कर्मचारी या फिर ठहरनेवाले ही बाहर से पानी की व्यवस्था कर पीते हैं.
चालू भी नहीं हुआ, खामियां आयीं सामने
बैरागी मोड़ के पास 50 बेड का रैन बसेरा बनकर तैयार हुआ है. यहां उद्घाटन से पहले ही कई तरह की खामियां सामने आ गयी हैं. निगम सूत्रों का कहना है कि नये बने रैन बसेरे में पानी की टंकी डैमेज हो गयी है. इसके साथ ही यहां की बोरिंग भी फेल हो गयी है. इसकी जानकारी नगर आयुक्त को दे दी गयी है. इसके लिए कनीय अभियंता को नगर आयुक्त ने जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है. बताया जाता है कि यहां पर रैन बसेरा स्टेशन पर पहुंचनेवाले गरीब लोगों के लिए बनाया गया है. लेकिन, लोगों के लिए अब तक रैन बसेरा खोला नहीं जा सका है.
क्या कहते हैं अधिकारी
एक बार जांच के दौरान व्यवस्था में सुधार का आदेश दिया था. इतनी कमी रैना बसेरे में है, इसकी रिपोर्ट अब तक एरिया लेबल फेडरेशन के माध्यम से नहीं दी गयी है. अब हमारे संज्ञान में यह बात सामने आयी है. जल्द ही जांच कर सभी जगहों की कमियों को दूर करा दिया जायेगा.
डॉ ईश्वर चंद्र शर्मा, नगर आयुक्त
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