बिहार : ...जब दलाई लामा ने बच्चों को पढ़ाया करुणा का पाठ
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Jan 2018 5:08 AM (IST)
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बोधगया : बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने गुरुवार को कालचक्र मैदान में स्कूली बच्चों को करुणा का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि मानव के पास उन्नत दिमाग है. इसको सही दिशा में मानवता की भलाई के लिए लगाया जाना चाहिए. इसके लिए जरूरी है कि हमें अपने अंत:करण में प्रेम व दया का भाव पैदा […]
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बोधगया : बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा ने गुरुवार को कालचक्र मैदान में स्कूली बच्चों को करुणा का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि मानव के पास उन्नत दिमाग है. इसको सही दिशा में मानवता की भलाई के लिए लगाया जाना चाहिए. इसके लिए जरूरी है कि हमें अपने अंत:करण में प्रेम व दया का भाव पैदा करें. हालांकि, वर्तमान की आधुनिक शिक्षा पद्धति से यह सब पूरी तरह संभव नहीं है. दलाई लामा ने भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति की वकालत करते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा पद्धति हमें भौतिकतावादी बनाती जा रही है. इसमें मन की शांति कतई संभव नहीं है. बौद्ध धर्मगुरु ने कहा कि भारत की वर्तमान शिक्षा नीति ब्रिटिश नीति पर आधारित है. यह भौतिक विकास के लिए तो ठीक है, पर अंत:करण की शांति के लिए यह कारगर नहीं है.
दुनिया के वैज्ञानिक भी यही मानते हैं कि इससे मानसिक सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती. इस कारण हमें आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा को भी साथ लेकर चलना होगा. भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति को पुन: लाना होगा. दलाई लामा ने कहा कि भारत में विभिन्न परंपरा व धर्म के लोग हजारों वर्षों से एक साथ रह रहे हैं. यह भारत की प्राचीन व आध्यात्मिक शिक्षा पद्धति का ही फलाफल है. नालंदा की परंपरा में भी सभी तरह की विद्याओं की पढ़ाई होती थी.
अतएव विकास के साथ-साथ शांति के लिए वर्तमान शिक्षा पद्धति में सुधार व बदलाव करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखना होगा. आज के युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा भी ग्रहण करने की जरूरत है.
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