बिहार में सफल नहीं हो रही डिजिटाइज्ड जमाबंदी, अब कमियों को दूर करने में जुटी सरकार

आला अधिकारियों की लापरवाही और गलत मंशा के कारण राज्य में बड़ी संख्या में डिजिटाइज्ड जमाबंदियों में कमियां रह गयी हैं. वह अपूर्ण हैं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने इस बात पर नाराजगी प्रकट की है.
पटना. आला अधिकारियों की लापरवाही और गलत मंशा के कारण राज्य में बड़ी संख्या में डिजिटाइज्ड जमाबंदियों में कमियां रह गयी हैं. वह अपूर्ण हैं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेश मेहरोत्रा ने इस बात पर नाराजगी प्रकट की है. डिजिटाइज्ड जमाबंदियों कमियों को दूर करने के लिये अभियान चलाने के निर्देश दिये हैं.
विभागीय बैठक में अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि पूर्व में इस संबंध में जो निर्देश दिये गये थे उनका अनुपालन नहीं किया गया है. इसी कारण लोगों को असुविधा हो रही है. उनको शिकायतें मिली हैं कि उच्च स्तर पर ऑनलाइन जमाबंदी अपूर्ण रखी जा रही हैं. अभियान चलाकर सभी डिजिटाइज्ड जमाबंदियों के त्रुटि निराकरण कराने की जिम्मेदारी अपर समाहर्त्ताओं की होगी.
ब्रजेश मेहरोत्रा ने कहा कि ऑनलाइन जमाबंदी जिसमें रकवा शून्य है, वैसे जमाबंदियों का मूल जमाबंदियों से मिलान कर रकवा में सुधार किया जायेगा. यदि मूल जमाबंदी में रकवा शून्य है तो ऐसे जमाबंदियों में शून्य जमाबंदी अंकित की जायेगी. इसके लिये एनआईसी सॉफ्टवेयर को विकसित करेगी.
म्यूटेशन वादों का निष्पादन समय सीमा में नहीं करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जायेगी. एडीएम और डीसीएलआर यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी आवेदन समय सीमा के अन्दर निष्पादित कर लिये जायें. समय सीमा में म्यूटेशन नहीं होता है तो जान-बूझकर लापरवाही करने वाले दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
उन्होंने कहा कि यदि किसी अंचल में अस्वीकृत आवेदन की संख्या अधिक है तो एडीएम खुद समीक्षा करेंगे. अथवा भूमि सुधार उप समाहर्ता के द्वारा अस्वीकृत किये गये आवेदनों के कारणों की जांच कर कार्रवाई होगी. अपर मुख्य सचिव ने सभी अपर समाहर्ता को निर्देश दिया है कि भूमि सुधार उप समाहर्ता स्तर पर लंबित म्यूटेशन वादों का 30 दिनों के अन्दर निस्तारण कराना सुनिश्चित करें.
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