प्लास्टर कटाने को भटकता रहा संजू
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 May 2016 6:53 AM (IST)
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हड़ताल का असर . मांगों पर अड़े िचकित्सक दरभंगा : हड़ताल का असर यह था कि संजू प्लास्टर कटाने के लिए यहां पहुंचा था लेकिन संजू को एक भी डॉक्टर व अस्पताल कर्मी प्लास्टर काटने को तैयार न थे. संजू तीन घंटों से प्लास्टर कटाने के लिए कभी हड्डी रोग के सीओटी तो कभी ओपीडी […]
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हड़ताल का असर . मांगों पर अड़े िचकित्सक
दरभंगा : हड़ताल का असर यह था कि संजू प्लास्टर कटाने के लिए यहां पहुंचा था लेकिन संजू को एक भी डॉक्टर व अस्पताल कर्मी प्लास्टर काटने को तैयार न थे. संजू तीन घंटों से प्लास्टर कटाने के लिए कभी हड्डी रोग के सीओटी तो कभी ओपीडी के हड्डी रोग विभाग के बीच भटक रहा था. कोई भी इस मरीज की सुधि लेनेवाला नहीं था. परिजन ने बताया कि वह घनश्यामपुर से यहां आये हैं. उन्हें यह नहीं मालूम था कि पीजी डाॅक्टर हड़ताल पर हैं. इसके लिए वे कहां जाये इसका दिशा निर्देश देनेवाला कोई नहीं मिला. इसमें मरीजों का क्या दोष. इस हड़ताल का खामियाजा मरीजों को भुगतना पर रहा है. इसके बाद परिजन मरीज को लेकर पेड़ के नीचे बैठ गये.
बैरंग लौटे ओटी के मरीज : मंगलवार को दूसरे दिन सर्जरी विभाग में एक भी मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो पाया. जीओटी तो खुले थे, लेकिन पीजी डॉक्टरों के अभाव में मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो पाया. वार्ड के मरीज ओटी के पास आये, लेकिन कर्मियों ने उन्हें बैरंग लौटा दिया. मात्र सीओटी में गंभीर मरीजों का ऑपरेशन हो पाया. सर्जरी के विभागाध्यक्ष डाॅ वीएस प्रसाद ने इसकी पुष्टि की है.
लेबर रूम भी प्रभावित : गायनिक वार्ड के लेबर रूममें भी डिलेवरी प्रभावित रहा. सामान्य दिनों से कम मरीजों का डिलेवरी कराया जा सका. वहीं कई महिलाओं को वापस लौटा दिया गया.
कहते हैं प्रभारी प्राचार्य
प्रभारी प्राचार्य डा. बीके सिंह ने बताया कि पीजी डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने को लेकर डीएमसीएच प्रशासन ने तैयारी कर रखी है. 19 डॉक्टरों को कई विभागों में तैनात किया गया है. जरुरत पड़ने पर डीएमसी के नन क्लिनिकल एवं पीएचसी से डॉक्टरों को यहां प्रतिनियोजित किया जायेगा.
हड़ताल पर डटे रहेंगे पीजी डॉक्टर
पीजी डॉक्टर नीरज कुमार ने बताया कि पीएमसीएच में स्वास्थ्य के प्रधान सचिव के साथ वार्ता जारी है. मांगों की पूर्ति होने तक यह हड़ताल जारी रहेगी. पीजी डॉक्टरों ने आज भी मरीजों के उपचार किये. उपचार व्यवस्था में किसी तरह का व्यवधान नहीं डाला गया है. उनकी लड़ाई मरीज से नहीं सरकार से है.
मरीजों की संख्या : सेंसस रिपोर्ट के अनुसार वार्डों में मरीजों की संख्या 582 से घटकर 551 हो गयी है. इसमें सबसे अधिक मरीज हड्डी रोग वार्ड में हैं. हड़ताल के कारण 116 मरीजों को छुट्टी दे दी गयी है.
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