हवा में नमी के कारण आलू में झुलसा रोग का बढ़ा खतरा

Updated at :15 Dec 2015 6:51 PM
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हवा में नमी के कारण आलू में झुलसा रोग का बढ़ा खतरा

हवा में नमी के कारण आलू में झुलसा रोग का बढ़ा खतरा नियमित रुप से करें फसल की निगरानी, घोल बनाकर करें छिड़काव दरभंगा. हवा में अधिक नमी के कारण आलू, टमाटर, मटर एवं अन्य सब्जियों वाली फसल में अगेती झुलसा रोग की संभावना रहती है. इसलिए फसल की नियमित रुप से निगरानी करें. अगात […]

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हवा में नमी के कारण आलू में झुलसा रोग का बढ़ा खतरा नियमित रुप से करें फसल की निगरानी, घोल बनाकर करें छिड़काव दरभंगा. हवा में अधिक नमी के कारण आलू, टमाटर, मटर एवं अन्य सब्जियों वाली फसल में अगेती झुलसा रोग की संभावना रहती है. इसलिए फसल की नियमित रुप से निगरानी करें. अगात झुलसा रोग का प्रकोप फसल में दिखने पर इसके बचाव के लिए 2़ 0 से 2़ 5 ग्राम डाई-इथेन एम.45 फफूंदनाशक दवा का प्रति लीटर पानी की दर से घोल बना कर छिड़काव करें. यह कहना है कि राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डा ए सत्तार का. किसानों के लिए जारी समसामयिक सुझाव में उन्होंने कहा है कि विलम्ब से बोयी जाने वाली गेहूं की किस्मों की बुआई के लिए मौसम अनुकूल है. विलम्ब से बुआई के लिए पीबीडब्लू 373, एचडी 2285, एचडी 2967, एचडी 2643, एचयूडब्लू 234, डब्लूआर 544, डीबीडब्लू 14, एन डब्लू 2036 तथा एच डब्लू 2045 किस्में अनुशंसित है. बुआई के पूर्व 40 किलोग्राम नेत्रजन, 40 किलोग्राम फॉस्फोरस एवं 20 किलोग्राम पोटास प्रति हेक्टेयर डालें. बीज को बुआई से पहले 2़5 ग्राम बेबीस्टीन सेे प्रति किलो ग्राम बीज को उपचारित करें. छिटकवां विधि से बुआई के लिए प्रति हेक्टेयर 150 किलो ग्राम तथा सीड ड्रिल से पंक्ति में बुआई के लिए 125 किलो ग्राम बीज का व्यवहार करें. जिसकी गेंहू की फसल 20-25 दिनों की हो गयी हो, वा उसमें हल्की सिंचाई अवश्य करें. सिंचाई के 2-3 दिनों बाद नेत्रजन उर्वरक की मात्रा डालें. गत माह रोप की गयी आलू की फसल में निकौनी करें. निकौनी के बाद नेत्रजन उर्वरक का उपरिवेशन कर आलू में मिट्टी चढ़ा दें. आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें. सब्जियों में निकाई-गुड़ाई एवं जरुरत भर की सिंचाई करें. फूलगोभी व पत्ता गोभी वाली फसल में पत्ती खाने वाली कीट (डायमंड बैक मॉथ) की रोकथाम के लिए स्पेनोसेड दवा एक मिली प्रति 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. बैगन की फसल को तना एवं फल छेदक कीट से बचाव के लिए ग्रसित तना एवं फलों को इकठा कर नष्ट कर दें. यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड 48 इसी/ एक मिली प्रति 4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें. मशरूम की वृद्धि पर गिरते तापमान का कुप्रभाव पड़ सकता है. उत्पादन गृह में तापक्रम 25़ 28 सेंटीग्रेड बनाये रखें.

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