हमें होना चाहिए गर्व, वश्वि की भाषा है संस्कृत : कुलपति

Updated at :07 Dec 2015 8:33 PM
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हमें होना चाहिए गर्व, वश्वि की भाषा है संस्कृत : कुलपति

हमें होना चाहिए गर्व, विश्व की भाषा है संस्कृत : कुलपति फोटो :::::::3,4परिचय ::प्रधानाचार्यों की बैठक में वीसी डा. देवनारायण झा व अन्य , दरबार हॉल में उपस्थित प्राचार्य संस्कृत विवि में कॉलेजों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक दरभंगा : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के दरबार हॉल में सोमवार को कुलपति डा.देवनारायण झा की […]

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हमें होना चाहिए गर्व, विश्व की भाषा है संस्कृत : कुलपति फोटो :::::::3,4परिचय ::प्रधानाचार्यों की बैठक में वीसी डा. देवनारायण झा व अन्य , दरबार हॉल में उपस्थित प्राचार्य संस्कृत विवि में कॉलेजों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक दरभंगा : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के दरबार हॉल में सोमवार को कुलपति डा.देवनारायण झा की अध्यक्षता में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राधानाचार्यों की बैठक सह कार्यशाला आयोजित हुई. विषय प्रवेश कराते हुए प्रतिकुलपति डा. नीलिमा सिन्हा ने प्रधानाचार्यों को निर्देशित करते हुए कहा कि अपने महाविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रखें. साथ ही विवि प्रशासन के साथ सामंजस्य स्थापित कर कॉलेज को विकास के पथ पर आगे बढायें. कुल सचिव डा. सुरेश्वर झा ने कहा कि इस विवि छात्र बड़ी संख्या में नौकरी पेशा में तो हैं हीं साथ ही समाज को भी दिशा देने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं. जो इस बात को दर्शाता है कि संस्कृत विवि भी देश एवं समाज के लिए योग्य नागरिक तैयार करने में अहम भूमिका निभा रही है. आज के दौर में गुणवत्तापूर्ण पांडित्य का अभाव समाज में देखने को मिलता है. ऐसे में छात्रों की कॉलेज में नियमित उपस्थिति एवं बेहतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर हम इस अभाव को दूर कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा के प्रति लोगों को जागरुक कर हम कॉलेज में छात्रों की संख्या को बढा सकते हैं. संबद्ध कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विवि प्रशासन एवं अंगीभूत कॉलेजों में इस कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है.जल्द ही शिक्षकों की कमी दूर होगी.वहीं उन्होंने 62 संबंद्ध एवं अंगीभूत महाविद्यालयों में से 48 महाविद्यालय टूएफ एवं 12बी से रजिस्टर्ड होने के कारण यूजपीसी से मिलने वाला अनुदान प्राप्त कर रहा है. वहीं नैक से मूल्यांकन के लिए आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि नैक के जो मापदंड हैं उस पर खड़ा उतरने के लिए हरसंभव प्रयास करें. ऐसा नहीं होने पर राज्यानुदान भी बंद होने की संभावना है. अध्यक्षीय भाषण करते हुए कुलपति डा. झा ने कहा कि संस्कृत विश्व की भाषा है. इसके कारण राज्य सरकार एवं भारत सरकार के अलावा दूसरे देश की नजर भी इस विवि पर है. हमें इसका गर्व होना चाहिए और इस विवि की गरिमा को बरकरार रखने के लिए हरसंभव कोशिश करनी चाहिए. /इमहाराज की प्रतिमा के लिए प्रधानाचार्यो ने दिये एक लाख/इविवि में महाराजाधिकार कामेश्वर सिंह की प्रतिमा स्थापित करने के लिए विभिन्न महाविद्यालय के प्रधानाचार्यों ने अपनी ओर से सहयोग राशि देने की घोषणा की, जो एक लाख रुपये से उपर है. पहले से भी पांच लाख रुपये प्रतिमा निर्माण मद में विवि में जमा है. बैठक में विभिन्न महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यो ने हिस्सा लिया.

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