20 नवंबर तक कर लें मक्का की बुआई
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Nov 2015 6:52 PM
20 नवंबर तक कर लें मक्का की बुआई बोने से पहले बीज को कर लें उपचारित दरभंगा. किसानों के लिए जारी समसामयिक सुझाव में कृषि वैज्ञानिक ने कहा है कि रबी मक्का की बुआई 30 नवंबर तक संपन्न कर लें. अन्यथा उपज प्रभावित हो सकती है. बीज को बुआई से पहले कैप्टॉन या थीरम नामक […]
20 नवंबर तक कर लें मक्का की बुआई बोने से पहले बीज को कर लें उपचारित दरभंगा. किसानों के लिए जारी समसामयिक सुझाव में कृषि वैज्ञानिक ने कहा है कि रबी मक्का की बुआई 30 नवंबर तक संपन्न कर लें. अन्यथा उपज प्रभावित हो सकती है. बीज को बुआई से पहले कैप्टॉन या थीरम नामक दवा के 2़5 ग्राम मात्रा से प्रति किलो ग्राम बीज को उपचारित कर बुआई करें. अगात बोये गये मक्का में निकौनी कर खरपतवार निकालें. पिछात धान की कटाई कर जल्द से जल्द गेहूं की बुआई करें. सिंचित एवं सामान्य समय पर बुआई हेतु पीबीडब्लू-343, पीबीडब्लू-443, एचडी-2733, एचडी-2967, एचडी-2824, के-9107, के-307, एचयूडब्लू-206 किस्में अनुशंसित हैं. बीज को बुआई से पहले 2़5 ग्राम बेबीस्टीन सेे प्रति किलो ग्राम बीज को उपचारित करें. बुआई के समय 60 किलो ग्राम नेत्रजन, 60 किलो ग्राम फॉसफोरस एवं 40 किलो ग्राम पोटास प्रति हेक्टेयर डालें. छिटकबां विधि से बुआई के लिए प्रति हेक्टेयर 125 किलो ग्राम तथा सीड ड्रील से पंक्ति में बुआई के लिए 100 किलो ग्राम बीज का व्यवहार करें. बीज के अच्छे जमाव के लिए खेत में नमी का होना आवश्यक है. चना की बुआई 10 दिसम्बर तक सम्पन्न कर लें. अन्यथा उपज प्रभावित हो सकती है. चना के लिए उन्नत किस्म पूसा-256, केपीजी-59(उदय), केडब्लूआर-108, पूसा 372 अनुशंसित हैं. बुआई से पूर्व बीज कोे उपचारित करें. गत माह के लगाये गये आलू के पौधों की उॅचाई 15-22 से0मी0 हो जाने पर आलू में निकौनी कर मिट्टी चढ़ाने का कार्य करें. आवश्यकतानुसार सिंचाई करें. चारे के लिए जई तथा बरसीम की बुआई करें. जई के लिए 80-100 किलो ग्राम बीज तथा बरसीम के लिए 25-30 किलो ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर का व्यवहार करें.सब्जियों में निकाई-गुड़ाई एवं आवश्कतानुसार सिंचाई करें. फुल गोभी व पत्ता गोभी वाली फसल में पत्ती खाने वाली कीट (डायमंड बैक मॉथ) की रोकथाम के लिए स्पेनोसेड दवा एक मिली प्रति 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. बैगन तथा टमाटर की फसल को तना एवं फल छेदक कीट से बचाव के लिए ग्रसित तना एवं फलो को इकट्ठा कर नष्ट कर दें, यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड 48 इसी/ 1 मिली प्रति 4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें. दुधारु पशुओं का दुग्ध उत्पादन बढा़ने के लिए दाना, हरे एवं शुष्क चारे के मिश्रण खिलायें. इनके आहार में प्रयाप्त मात्रा में प्रोटीन, काब्रोहाइड्रेट, वसा, विटामिन्स, खनिज लवण का समावेश करें.
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