अफसरों की मौज, अधूरा रहा गरीबों के आवास का सपना
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Jan 2017 6:22 AM (IST)
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बेतिया : सरकारी आवासों में मौज काट रहे अफसरों की सुस्ती ने गरीबों के आवास के सपने को सपना ही रहने दिया. आवास के लिए आस लगाये बेघरों की सूची बीते वर्ष बनती बिगड़ती रही लेकिन किसी को आवास का पैसा नहीं मिला. सर्वे में ही अफसरों ने साल 2016 के 365 दिन गुजार दिये. […]
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बेतिया : सरकारी आवासों में मौज काट रहे अफसरों की सुस्ती ने गरीबों के आवास के सपने को सपना ही रहने दिया. आवास के लिए आस लगाये बेघरों की सूची बीते वर्ष बनती बिगड़ती रही लेकिन किसी को आवास का पैसा नहीं मिला. सर्वे में ही अफसरों ने साल 2016 के 365 दिन गुजार दिये. आवास बनवाने की बात तो दूर अफसर एक भी आवास की स्वीकृति तक नहीं दिला सके. वह भी तब, जब प्रधानमंत्री आवास योजना, लोहिया आवास योजना, जैसी तमाम योजनाएं चल रही है.
गांव से शहर तक जिनके पास अपना छत नहीं है उनके लिए सरकार ने घर देने की योजना तो बना दी लेकिन विभाग की उदासीनता के कारण वर्ष 2016 में एकभी आवास की स्वीकृति जिला स्तर से नंही मिल पायी. लिहाजा गरीबों को आवास देने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार की मंशा को ही जिले के अधिकारियों ने पलीता लगा दिया. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले सात माह से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत अभी तक पात्रों का चयनित सूची जिला मुख्यालय को प्राप्त नहीं हो पाया है.
ऐसे में मकान का सपना पाले गरीब प्रखंड कार्यालय से लेकर जिला मुख्यालय तक दौड़ लगाते रहे है. जबकि भारत सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2022 तक सभी के लिए मकान उपलब्ध करा दिया जाय लेकिन इसे अमलीजामा पहनाने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी हीं धीमी गति से कार्य को आगे बढ़ा रहे है. वितीय वर्ष के दस माह बीतने को हुए लेकिन अभी तक लाभार्थियों की चयनित सूची ही नहीं बन पायी है.
नाम तो बदला पर कार्यशैली नहीं ं
वितीय वर्ष 2016-17 में इंदिरा आवास को बंद कर केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना लागू करने का आदेश दिया. इस योजना के तहत प़चम्पारण जिले को कोई भी लक्ष्य नहीं दिया गया. वर्ष 2011 की सामाजिक आर्थिक जातिगत जनगणना (एसईसीसी)के अनुसार आवास विहीन गरीबों या कच्चे मकान वालों को शामिल किया जाना था. जिसके लिए नवगठित ग्राम पंचायत मेंवार्ड सभा के माध्यम से लाभार्थियों का चयन किया जाना था. इसमें अल्पसंख्यक, अनुसूचित जनजाति के अलावे सामान्य वर्ग के भी निर्धन व्यक्तियों का आवास निर्माण किया जाना है.
आंकड़ों का खेल : यदि आंकड़ो पर गौर करे तो प़चम्पारण में वितीय वर्ष 15-16 की समाप्ति के दौरान जिले में इंदिरा आवास योजना मद में 417 करोड़ 60 लाख 88 हजार रुपये उपलब्ध था. जिसमें से इस योजना के बंद होने के बाद लिये गये लक्ष्य में भुगतान करने योग्य राशि बचाकर सरकार को 280 करोड़ 7 लाख 20 हजार रुपये वापस कर दी गयी. कुल उपलब्ध 136 करोड़ 90 लाख 68 हजार में 127 करोड़ 90 लाख 76 हजार रुपये उक्त वितीय वर्ष में खर्च कर दिये गये. जिले में चयनित 20029 इंदिरा आवासों में 9120 आवास पूर्ण हो गये थे. जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक भी लक्ष्य हासिल नहीं हुआ था.
प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए लाभार्थियों की चयनित सूची की मांग प्रखंड विकास पदाधिकारियों से की गयी है. ग्राम सभा के माध्यम से चयनित लाभार्थियों की समेकित सूची प्राप्त होते ही अग्रेतर कार्रवाई आरंभ कर दी जायेगी. जिले के पंचायतो के प्रत्येक वार्डों में वार्ड सभा कर पात्रों का चयन अब अंतीम चरण में है. शीघ्र ही योजनाओं का लाभ लाभार्थियों को मिलेगा.
आवास के लिए तमाम योजनाओं के लागू होने के बाद भी पूरे साल एक भी आवास की स्वीकृति नहीं ं दिला सके अफसर
सर्वे में ही अफसरों ने गुजार दिये साल 2016 के 365 दिन, बेघर लगाते रहे कार्यालयों के दौड़
कई बार सूची में किया गया हेरफेर, किसी ने नहीं ं दिखाई सक्रियता
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