मृत्यु जीवन का अंत नहीं, शुरुआत

Published at :03 Nov 2016 5:26 AM (IST)
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मृत्यु जीवन का अंत नहीं, शुरुआत

पर्व दिवस. कैथोलिक धर्मावलंबियों ने मनाया ऑल सोल्स डे, अपने पूर्वजों को िकया याद कब्रों पर मोमबत्तियां जला कर की प्रार्थना, मृत रिश्तेदारों को किया याद ताजे फूलों से आकर्षक ढंग से सजाये गये थे कब्र बेतिया : आज हम सब यहां उपस्थित होकर अपने मृत रिश्तेदारों को याद कर रहे हैं. क्योंकि हम सब […]

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पर्व दिवस. कैथोलिक धर्मावलंबियों ने मनाया ऑल सोल्स डे, अपने पूर्वजों को िकया याद

कब्रों पर मोमबत्तियां जला कर की प्रार्थना, मृत रिश्तेदारों को किया याद
ताजे फूलों से आकर्षक ढंग से सजाये गये थे कब्र
बेतिया : आज हम सब यहां उपस्थित होकर अपने मृत रिश्तेदारों को याद कर रहे हैं. क्योंकि हम सब ऐसा मानते हैं कि जो ईश्वर में विश्वास करते हैं, वे मरने पर भी जीवित रहेंगे. जो यहां दफनाये गये हैं, वे सब प्रभु येशु में जीवित हैं.
ऑल सोल्स डे अर्थात मृतकों के पर्व दिवस के अवसर पर नगर के कमलनाथनगर स्थित कब्रिस्तान में आयोजित विशेष प्रार्थना को संबोधित करते हुए बेतिया धर्मप्रांत के प्रशासक सह स्थानीय महागिरिजाघर के मुख्य पुरोहित फादर लॉरेंस पास्कल ने कही. उन्होंने कहा कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि जीवन की शुरुआत है. हमारी ईश्वर जिसने हमें बनाया है,
हमे यह स्वतंत्रता दी है कि हम जीवन या मौत दोनों में से किसी एक को चुने अर्थात या तो हम अपने जीवन को अच्छाई रूपी जीवन बनाकर रखें अन्यथा बुराई के सामान अपना जीवन व्यतीत करें. विशेष प्रार्थना के दौरान उपदेश देते हुए फादर प्रकाश ने कहा कि आज हम सबका यहां उपस्थित होना तीन चीजें बताता है. जिसमें याद करना, धन्यवाद देना और प्रार्थना करना तथा सीखना शामिल है.
जिसका अर्थ है हम यहां उपस्थित होकर अपने मृत परिजनों को याद करें. परिवार के प्रति उनके त्याग व कर्त्तव्यों को याद करें. दूसरा उनके लिए हम भगवान को धन्यवाद दें कि हमारे जीवन में उनका साथ मिला तथा यह प्रार्थना करें कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. साथ ही उनके माध्यम से अपने परिवार के लिए प्रार्थना करें. तीसरा हम यह सीख लें कि जितने लोग यहां दफनाये गये हैं, उन सबका जीवन का स्टेटस अलग-अलग होगा. कोई धनी होगा और कोई गरीब.
लेकिन मरने के बाद वे सब एक स्टेटस में सबके साथ हैं़ अर्थात हम जब तक जीवित हैं, अपना जीवन दूसरों की सेवा, त्याग व प्यार में समर्पित करें. अपने परिवार को प्यार करें. बच्चों को अच्छे संस्कार दें. ताकि वे आगे चलकर समाज का सही मार्गदर्शन कर सकें. विशेष प्रार्थना में फादर पॉल जोसेफ, फादर गाव्रियल माइकल, फादर क्रिस्टोफर केरकेट्टा, फादर आनंद पास्कल, फादर डोनाल्ड मिरांडा, फादर सचिन एक्का, फादर किशोर के साथ-साथ हजारों की संख्या में इसाई श्रद्धालु उपस्थित रहे.
विशेष प्रार्थना को संबोधित करते पुरोहितगण.
रिश्वतेदारों के कब्रों पर मोमबत्तियां जला कर प्रार्थना करते श्रद्धालु .
मृतकों को याद कर मांगीं दुआएं की शांति प्रार्थना
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