नियम तोड़ लग रहे होर्डिंग्स मनमानी. सड़क से 100 मीटर के दायरे में लगाने पर है रोक

Published at :07 Jun 2017 5:01 AM (IST)
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नियम तोड़ लग रहे होर्डिंग्स मनमानी. सड़क से 100 मीटर के दायरे में लगाने पर है रोक

बेतिया : होर्डिंग-बैनर को लेकर यूं तो बकायदा सरकारी गाइडलाइन है, लेकिन यहां तो अपने शहर में इसका न तो कोई नियम है न ही कायदा. बिना किसी मंजूरी के मेन रोड पर विज्ञापन वाले बैनर-होर्डिंग अब आम बात है. इसका खामियाजा यह है कि शहर में दुर्घटनाओं के मामले बढ़ गये हैं. शहर की […]

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बेतिया : होर्डिंग-बैनर को लेकर यूं तो बकायदा सरकारी गाइडलाइन है, लेकिन यहां तो अपने शहर में इसका न तो कोई नियम है न ही कायदा. बिना किसी मंजूरी के मेन रोड पर विज्ञापन वाले बैनर-होर्डिंग अब आम बात है. इसका खामियाजा यह है कि शहर में दुर्घटनाओं के मामले बढ़ गये हैं. शहर की सुंदरता भी इन होर्डिंग ने खराब कर रखी है. सबसे अहम यह है कि मानसून करीब है. ऐसे में प्रशासन नहीं चेता तो आंधी-तुफान में कुकुरमुत्ते की तरह फैले यह होर्डिंग-बैनर जानलेवा साबित हो सकती है.

खास यह है कि बेतरतीब लगाई गई होर्डिंग और बैनरों से यातायात में भी व्यवधान उत्पन्न होता है. इससे बेपरवाह लोग बिना रोक-टोक के जहां मन आता है, वहीं पर होर्डिंग, बैनर लगा देते है. इस पर जिम्मेदारों ने भी चुप्पी साध रखी है. यातायात के दृष्टिकोण से सबसे संवेदनशील स्टेशन चौक, जनता सिनेमा को बैनरों एवं होर्डिंस से इस कदर पाट दिया गया है कि एक तरफ से दूसरी तरफ का रास्ता ही दिखाई नहीं पड़ता. शहर के सभी चौराहों और सड़कों से लेकर सार्वजनिक स्थानों की दीवारों तथा खंभों तक को प्रचार का माध्यम बना दिया गया है. सर्वाधिक मनमानी यूनिक पोल को लेकर है.
होर्डिंग स्ट्रेक्चर के सुरक्षित होने का प्रमाण भी जरूरी है, लेकिन वह भी होर्डिंग के साथ नहीं है. शहर का स्टेशन रोड, हॉस्पिटल रोड, तीन लालटेन चौक, नेपाली पथ आदि जगह होर्डिंग-बैनर लगे हुए हैं, जो सरकारी नियमों का माखौल उड़ा रहे हैं. इसमें नगर परिषद के कर्मचारियों की साठगाठ भी है. जिन्होंने मनमानी छूट दे रखी है.
होते हैं हादसे: होर्डिंग के असुरक्षित स्ट्रेक्चर के कारण शहर में हादसे भी हुए हैं. बीते दिनों ही एक होर्डिंग बैनर गिरने से एक बाइक चालक घायल हो गया था. इसके अलावे आबादी में लगे यह असुरक्षित स्ट्रेक्चर तेज हवा, आंधी-तुफान में यह जानलेवा बन सकते हैं.
दुर्घटनाओं का भी बन रहे कारण
यह है स्वीकृति का नियम
जानकारी के अनुसार, न के निर्धारित प्रोफार्मा व स्टांप, भवन की रजिस्ट्री के साथ भवन निर्माण की परमिशन, लोहे के स्ट्रक्चर का इंजीनियरिंग प्रमाण पत्र के साथ निगम में जमा कराना होता है. इस पर मासिक टैक्स क्षेत्र की दर के अनुसार तय किया जाता है. जबकि शहर में सैकड़ों होर्डिंग ऐसे है. जिनका न तो टैक्स जमा हो रहा है और कुछ की तो परमिशन ही नहीं ली गई है.
होर्डिंग की गाइडलाइन
सड़क से 100 मीटर के दायरे में
न हो होर्डिंग-बैनर
टर्न, तिराहा, चौराहे पर ट्रैफिक
में बाधा उत्पन्न न हो
दृष्टि बाधित न हो
हरा पेड़ होर्डिंग से न दबे
बिजली की हाई टेंशन लाइन न हो
पुराना भवन पर होर्डिंग नहीं लगी हो
लोहे के स्ट्रक्चर का इंजीनियर का प्रमाण पत्र
भवन की छत के 50%-60% हिस्से पर ही होर्डिंग लगा हो
नियमों के अनुसार ही लगेंगे होर्डिंग्स-बैनर
इसकी जानकारी है. ट्रैफिक सेंस के मापदंड को शहर में लगे होर्डिंग-बैनर पूरे नहीं कर रहे हैं. इसको लेकर जल्द ही बैठक बुलायी जायेगी. टेंडरधारी को निर्देशित किया जायेगा कि वह नियमों के अनुसार ही होर्डिंग-बैनर लगवाये. नियमों का पालन नहीं करने वाले होर्डिंग्स को अतिक्रमण मानते हुए उसे हटवाया जायेगा.
डा. विपिन कुमार, इओ नगर परिषद
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