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आठ वर्षों से बंद है दुबौली व पूर्वी डेमहा जलापूर्ति परियोजना

Updated at : 14 Jun 2019 6:46 AM (IST)
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आठ वर्षों से बंद है दुबौली व पूर्वी डेमहा जलापूर्ति परियोजना

गड़हनी : प्रखंड क्षेत्र के दुबौली व पूर्वी डेमहा में सौर ऊर्जा चालित ग्रामीण जलापूर्ति योजना का लाभ ग्रामीणों को आठ सालों से नहीं मिल रहा है. एक तरफ भीषण गर्मी में धरती का जल स्तर नीचे चला गया है और पानी के लिए लोगों में हहाकार मचा हुआ है. कई चापाकलों ने पानी देना […]

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गड़हनी : प्रखंड क्षेत्र के दुबौली व पूर्वी डेमहा में सौर ऊर्जा चालित ग्रामीण जलापूर्ति योजना का लाभ ग्रामीणों को आठ सालों से नहीं मिल रहा है. एक तरफ भीषण गर्मी में धरती का जल स्तर नीचे चला गया है और पानी के लिए लोगों में हहाकार मचा हुआ है. कई चापाकलों ने पानी देना बंद कर दिया है. वहीं दूसरी ओर विगत आठ वर्षों से बंद पड़ी इस जलापूर्ति परियोजना से लोग आहत हैं.

अधिकारियों व सरकार की अनदेखी के कारण इसकी सुधी लेनेवाला कोई नहीं है. जानकारी के अनुसार केंद्र व राज्य सरकार की लगभग 18 लाख रुपये की लागत आठ साल पूर्व तत्कालीन सांसद राम प्रसाद सिंह, विधायक विजेंद्र कुमार यादव की उपस्थिति में चालू की गयी थी. उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता तत्कालीन उत्पाद मंत्री शिवानंद तिवारी ने की थी.
उस वक्त इस जलापूर्ति परियोजना के चालू होने से ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी कि अब ग्रामीणों को स्वच्छ व शुद्ध जल का लाभ मिलेगा, लेकिन उनके मंसूबों पर तब पानी फिर गया, जब पूरे गांव में जलापूर्ति पाइप नहीं लगायी गयी और सीमित क्षेत्र में पानी की आपूर्ति होती रही और इसके कुछ ही दिनों के बाद ही मामूली खराबी के कारण जलापूर्ति योजना बंद हो गयी. हालांकि कभी-कभार लोग मरम्मत कर चला दे रहे थे, लेकिन तीन साल के बाद धीरे-धीरे पूरी तरह यह परियोजना ठप हो गयी.
आज भी नहीं भूले जल की गुणवक्ता व विशेषता : स्थानीय ग्रामीण फुलेंद्र यादव ने इस जलापूर्ति परियोजना की विशेषता के बारे में बताते हैं कि तेज धूप रहने पर पानी की रफ्तार तेज हो जाती थी. भोजन बनाने के दौरान इस पानी का उपयोग करने पर चावल सफेद व मुलायम दिखता था. कम समय में दाल गल जाती थी. साथ ही परियोजना का पानी व चापाकल के पानी के स्वाद में काफी अंतर था. वैसे कुछ लोग बताते हैं कि पानी के सेवन से पेट की बीमारी नहीं होती थी. कपड़ा धोने में भी साबुन की खपत कम होती थी. क्योंकि परियोजना के तहत जल की निकासी 350 फुट नीचे से होती थी. ग्रामीण बैजू सिंह, बालकुंवर सिंह, दीपक सिंह ने बताया कि दुबौली तथा पूर्वी डेमहा गांव स्थित सौर ऊर्जा चालित जलापूर्ति परियोजना से लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी थी. ग्रामीणों ने राज्य सरकार से इस परियोजना को पुन: चालू कराने की मांग की है.
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