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छठ महापर्व : डुमरांव के राजेश्वर मंदिर में स्थित सूर्यदेव बनें आस्था का केंद्र

Updated at : 13 Nov 2018 3:21 PM (IST)
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छठ महापर्व : डुमरांव के राजेश्वर मंदिर में स्थित सूर्यदेव बनें आस्था का केंद्र

– संवत 1856 में श्री 108 मती महारानी वेणी प्रसाद कुमारी ने कराया था मंदिर का निर्माण – राम जानकी, शिव परिवार, गणेशजी, दुर्गाजी सहित सूर्यदेव की है प्राचीन प्रतिमा डुमरांव : डुमरांव के चारों दिशा में ऐतिहासिक व प्राचीन मंदिर मौजूद है. इस क्रम में छठिया पोखरा से अनुमंडल कार्यालय जाने वाले मार्ग पर […]

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– संवत 1856 में श्री 108 मती महारानी वेणी प्रसाद कुमारी ने कराया था मंदिर का निर्माण

– राम जानकी, शिव परिवार, गणेशजी, दुर्गाजी सहित सूर्यदेव की है प्राचीन प्रतिमा

डुमरांव : डुमरांव के चारों दिशा में ऐतिहासिक व प्राचीन मंदिर मौजूद है. इस क्रम में छठिया पोखरा से अनुमंडल कार्यालय जाने वाले मार्ग पर प्राचीन राजेश्वर मंदिर हर व्यक्ति को आर्कषित करता है. मंदिर में रामजानकी, शिव परिवार, गणेश जी, मां दुर्गा और इस मंदिर में जिले का एकलौता सूर्यदेव की प्राचीन प्रतिमा मौजूद है. मंदिर वर्षो से बंद रहा. लेकिन 2009 में इसमें लोगों का आवागमन शुरू हुआ. इस मंदिर का निर्माण श्री 108 मती महारानी वेणी प्रसाद कुमारी ने संवत 1856 में कराया है.

इसको प्रमाण करता है रामजानकी मंदिर के मुख्य दरवाजे के नीचे पत्थर पर लिखा संवत. मंदिर में रामजानकी का मंदिर बीच में, जबकि शिव परिवार, मां दुर्गा मंदिर, गणेशजी और सूर्यदेव का मंदिर चारों दिशा में मंदिर परिसर में मौजूद है. श्रद्धालू चारों ओर परिक्रमा करते है, तो चारों मंदिर में देवी-देवाताओं का दर्शन होता है.

शिव परिवार में जिले में एकलौता मंदिर है, जिसमें हनुमान जी अपने गदा के साथ ढाल के साथ दिख रहे हैं. पंडित मुकुंद माधव मिश्रा ने बताया कि छठिया पोखरा पर लोक आस्था के महापर्व पर भगवान भाष्कर का अध्र्य देते है, लेकिन अधिकतर लोगों को नहीं जानकारी थी कि इस मंदिर में सूर्यदेव की प्राचीन मूर्ति स्थापित है.

दो-तीन साल से मंदिर में श्रद्धालुओं के आवागमन से मंदिर परिसर गुलजार होने लगा है. इस मंदिर ठीक सामने भी ऐतिहासिक मंदिर है. लेकिन इस मंदिर की खास बात यह है कि सूर्यदेव की प्राचीन प्रतिमा विराजमान है. मंदिर परिसर में प्रतिदिन सुबह-शाम नियमित आरती होती है. जिसमें आस-पास के लोग पहुंचते है.

बता दें कि यह मंदिर की कलाकृति आकर्षित करती है. यह भी मंदिर राजपरिवार से जुड़ा है. डुमरांव पर्यटक स्थल के रूप में उभर सकता है. इतिहास के पन्नों पर नया भोजपुर नवरत्न गढ़ किला, शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला खां की जन्म स्थली, बावन दुअरियां, सिंधोरा निर्माण, ग्लेज्ड टाईल्स, डुमरांव टेक्सटाइल्स, लालटेन फैक्ट्री सिमटते जा रहा है.

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