बक्सर जेल को कंप्यूटराइज्ड व पेपर लेस बनाने की तैयारी

Updated at : 15 Dec 2017 3:57 AM (IST)
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बक्सर जेल को कंप्यूटराइज्ड व पेपर लेस बनाने की तैयारी

अपराधियों का रखा जायेगा पूरा डाटा हर रोज ली जायेगी बंदियों की फोटो बक्सर : जेल को पेपर लेस बनाने की तैयारी में जेल प्रशासन जुट गया है. जेल कंप्यूटराइज्ड होने जा रहा है. अब कैदियों का रेकाॅर्ड रजिस्टर में नहीं कंप्यूटर के डाटा में लोड होगा. सब डाटा बेस में फीड रहेगा. यहां तक […]

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अपराधियों का रखा जायेगा पूरा डाटा

हर रोज ली जायेगी बंदियों की फोटो
बक्सर : जेल को पेपर लेस बनाने की तैयारी में जेल प्रशासन जुट गया है. जेल कंप्यूटराइज्ड होने जा रहा है. अब कैदियों का रेकाॅर्ड रजिस्टर में नहीं कंप्यूटर के डाटा में लोड होगा. सब डाटा बेस में फीड रहेगा. यहां तक कि जेल में कैदियों से मुलाकात करने आने वाले लोगों का भी डाटा बनेगा. सरकार राज्य के कुछ जेलों को हाईटेक करने जा रही है, उनमें बक्सर के सेंट्रल ओपन जेल भी शामिल है. इससे जेल में कार्यरत बाबुओं से लेकर जेल के अधिकारियों को काफी सहूलियत होगी. एक क्लिक दबाने के बाद पल भर में जानकारी हासिल हो जायेगी.
ईआरपी प्रणाली से जुड़ जायेगा जेल: ईआरपी यानी ई प्रिजन योजना के तहत जेल के कामकाज को पेपर लेस बनाने के लिए इंटरप्राइजेज रिसोर्स प्लानिंग लागू हो जायेगी. यह एक अत्याधुनिक सिस्टम है, जिससे जेल के सभी कामकाज कंप्यूटर से किये जायेंगे.
ई प्रिजन ऑनलाइन सेवा है. इसके तहत बंदियों की न सिर्फ फोटो हर रोज ली जा रही है, बल्कि इनकी जानकारियों को भी ऑनलाइन किया जा रहा है. इसके तहत चार तरह का डाटा तैयार किया जा रहा है. जेल आने वाले बंदियों व छूटने वाले बंदियों की तस्वीरें ली जा रही है. इसके अलावा इनके अंगूठे के निशान भी लिए जा रहे हैं. इसे प्रतिदिन सेव कर ऑनलाइन किया जा रहा है. आने वाले व छूटने वाले बंदियों का नाम पता व अपराध से संबंधित पूरा डाटा सेव कर ऑनलाइन किया जा रहा है. इसे कभी भी आसानी से ऑनलाइन देखा जा सकता है.
ईआरपी है ऑफलाइन सेवा: ईआरपी के तहत आठ प्रकार का डाटा संग्रह किया जा रहा है. इसमें बंदियों से मिलने आने वाले मुलाकातियों के अलावा जेल सुरक्षा व अधिकारियों का सारा डाटा शामिल है. मुलाकातियों की तस्वीरें भी ली जा रही है. इसके तहत गेट मैनेजमेंट, विजिटर मैनेजमेंट, स्टॉक मैनेजमेंट, आर्म्स मैनेजमेंट, अस्पताल, अकाउंट, एचआर व वेजेज शामिल हैं. यह ऑफलाइन सेवा है. इसे जेल में देखा जा सकता है.
क्राइम कंट्रोल में सहायक: ई-प्रिजन व ईआरपी सिस्टम क्राइम कंट्रोल में सहायक होगा. डाटा संग्रह होने के कारण पुलिस को अपराधियों के बारे में जानकारी हासिल करने में सुविधा होगी. अंगूठे का निशान होने के कारण पुलिस को अपराधियों का सुराग लगाने में भी सुविधा होगी. अपराधियों की आवाज संग्रह करने की भी योजना है.
कैंटीन खोलने की कवायद: जेल में बंदियों के लिए कैंटीन खोलने की कवायद शुरू कर दी गयी है. जेल में बंदियों को ब्रेड पकौड़ा व अन्य जायकेदार स्नैक परोसने के लिए सरकार ने जेल प्रशासन को आदेश दिया है. इसके लिए सरकार 50 हजार रुपये देगी. जेल प्रशासन अपने स्तर से इसकी तैयारी कर रहा है.
टेलीफोन बूथ की भी तैयारी: जेल में टेलीफोन बूथ खोलने की भी तैयारी की जा रही है. बंदियों को अब अपने परिजनों से बात करने में फजीहत नहीं होगी. जेल के भीतर चोरी छुपे मोबाइल व सिम पहुंचाने का खतरा भी समाप्त हो जायेगा. इसके लिए सभी सामान जेल प्रशासन को उपलब्ध करा दिये गये हैं. जेल के भीतर तक केबल पहुंचाने के लिए बीएसएनएल द्वारा तार बिछाने का काम किया जा रहा है. जेल प्रशासन ने बंदियों से मुलाकात करने वाले परिजनों का आधार लिंक्ड मोबाइल नंबर संग्रह करना शुरू कर दिया है.
क्या कहते हैं अधिकारी
इससे न सिर्फ जेल की सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि अपराधियों का डाटा बेस जेल प्रशासन के पास रहेगा. इससे जेल प्रशासन को बंदियों के बारे में जानकारी मिल सकेगी व पुलिस को अपराध नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी. कैंटीन व टेलीफोन बूथ की सेवा भी जल्द शुरू होगी.
विजय अरोड़ा, जेल अधीक्षक सें ट्रल जेल बक्सर
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