अस्पताल से गायब थे डॉक्टर व नर्स, वार्ड में मौजूद अन्य महिलाओं ने ही प्रसूता का करवाया प्रसव

Updated at : 22 Jun 2020 6:19 AM (IST)
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अस्पताल से गायब थे डॉक्टर व नर्स, वार्ड में मौजूद अन्य महिलाओं ने ही प्रसूता का करवाया प्रसव

भागलपुर : जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रविवार देर शाम एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया. प्रसव वेदना से परेशान महिला को देख पास के बेड में अपने मरीज की देखभाल करने आयी तीन महिलाओं ने सहयोग किया. तीनों ने मिल कर इस महिला का प्रसव कराया.

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भागलपुर : जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रविवार देर शाम एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया. प्रसव वेदना से परेशान महिला को देख पास के बेड में अपने मरीज की देखभाल करने आयी तीन महिलाओं ने सहयोग किया. तीनों ने मिल कर इस महिला का प्रसव कराया. यह देख इमरजेंसी में जितने भी पुरुष मरीज और परिजन थे सभी बाहर चले गये. हैरान करने वाली बात यह थी कि जिस वक्त प्रसव कराया जा रहा था उस वक्त इमरजेंसी से डॉक्टर नर्स समेत सभी कर्मी गायब थे. मामले की जानकारी हेल्थ मैनेजर को भी दी गयी. जिसके बाद भागी-भागी नर्स आयी और नवजात को लेकर सीधे शिशु रोग विभाग गयी, तो महिला को गायनी वार्ड में भर्ती कराया गया. यहां बता दें ओपीडी में इमरजेंसी इसलिए आरंभ किया गया है कि यहां मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिले.

साड़ी और बेड की चादर का बनाया पर्दा

मुंगेर के अंतर्गत संग्रामपुर निवासी तीस साल की क्रांति देवी ओपीडी में बने इमरजेंसी में प्रसव वेदना से तड़प रही थी. रविवार होने के कारण नर्स डॉक्टर इस दौरान गायब थे. क्रांति की हालत लगातार बिगड़ रही थी, तो परिजन परेशान हो रहे थे. यह देख हबीबपुर की बेबी निराली, सरिता और जमालपुर की गीता देवी सामने आयी. ये तीनों महिलाएं अपने परिजन का इलाज कराने यहां पहुंची थी. तीनों ने अपने अपने परिजनों को बाहर किया, क्रांति को कवर करने के लिए बेड का चादर और साड़ी लेकर सामने आ गयी.

क्रांति देवी ने बताया

क्रांति ने बताया 17 जून को अचानक उसके शरीर में दर्द शुरू हो गया. इसी दिन रात आठ बजे के करीब अस्पताल में उसे भर्ती किया गया. उनका इलाज डॉ अविलेष की यूनिट में हो रहा था. वहीं, परिजनों ने बताया क्रांति देवी आठ माह की गर्भवती थी. रविवार शाम प्रसव वेदना शुरू हो गयी. परेशान क्रांति को देख हम लोगों ने नर्सिंग स्टेशन से लेकर कंट्रोल रूम तक का चक्कर लगाया. किसी ने हमारी एक नहीं सुनी. सभी एक दूसरे को बोलने के लिए कहते रहे. नर्स को भी खोजने का प्रयास किया लेकिन कोई भी हमारी मदद के लिए सामने नहीं आयी. डॉक्टर जो दिखे उनसे भी आग्रह किया गया, लेकिन किसी ने हमारी एक नहीं सुनी. लोगों का आरोप है कि कोविड अस्पताल बनने के बाद से यहां के लगभग आधे डॉक्टरों की मौज है. जिनकी ड्यूटी कोविड में लगती है, वही अस्पताल में दिखते हैं. सीनियर डॉक्टर तो यहां खोजे से भी नहीं मिलते.

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