कानून तोड़ 16 साल में बने 332 से अधिक घर, नोटिस भेज निगम भूला
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Oct 2018 7:51 AM
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संजीव/ललित, भागलपुर : निगम क्षेत्र में कानून को तोड़कर 16 साल में अवैध तरीके से 332 से ज्यादा मकान बन गये. लेकिन नगर निगम इनपर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस भेजकर सो गया. कुछ मकान के मालिकों को दंडित तो किया गया, लेकिन इनमें से ज्यादातर लोग इत्मिनान से अपने मकानों में रह रहे […]
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संजीव/ललित, भागलपुर : निगम क्षेत्र में कानून को तोड़कर 16 साल में अवैध तरीके से 332 से ज्यादा मकान बन गये. लेकिन नगर निगम इनपर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस भेजकर सो गया. कुछ मकान के मालिकों को दंडित तो किया गया, लेकिन इनमें से ज्यादातर लोग इत्मिनान से अपने मकानों में रह रहे हैं या इनमें व्यवसाय कर रहे हैं.
यह अवैध तरीके से बने मकानों की वह संख्या है, जिसकी जानकारी गाहे-बगाहे नगर निगम की अवैध निर्माण शाखा को मिलती गयी और नोटिस भेजा जाता रहा. लेकिन हकीकत यह है कि ऐसे अवैध मकानों की वास्तविक संख्या निगम के पास मौजूद आंकड़ों से काफी ज्यादा है.
कार्रवाई नहीं करने के पीछे निगम की अवैध निर्माण शाखा का अपना तर्क भी है. शाखा के कर्मियों का कहना है कि अन्य विभागों व शाखाओं का कोई सहयोग नहीं मिलता है. बिना पुलिस बल के अवैध निर्माण पर रोक लगाने जाते हैं, तो लोग भाव नहीं देते.
पहले 236, फिर 96 नोटिस हुआ जारी: नगर निगम ने वर्ष 2002 से 2017 तक 236 अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस जारी किया था. वर्ष 2013-14 में इनमें कुछ होल्डिंगधारकों को दंडित भी किया गया. इनसे करीब एक करोड़ रुपये वसूली की गयी थी. इसके बाद किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी. फिर 27.4.18 से 4.10.18 तक 96 लोगों को अवैध निर्माण के खिलाफ नोटिस किया गया. लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी.
अवैध निर्माण का शहर पर असर
नालियों पर घर : कई घर ऐसे हैं, जिसके अंदर से निगम की नालियां गुजरती है. इससे नालियां ठीक तरीके से साफ नहीं हो पा रही और नाला जाम की समस्या बनी हुई है.
शहर जाम : कई व्यावसायिक संस्थान ऐसे हैं, जिसके पास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है. नतीजा यह हो रहा है कि वाहन सड़कों पर लगाये जाते हैं और शहर जाम से परेशान रहता है.
- वर्ष 2013-14 के बाद नगर निगम की ओर से किसी भी अवैध निर्माण करनेवाले के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई
- अवैध निर्माण शाखा को नहीं मिलता है पुलिस का सहयोग, कर्मचारी पहुंचते हैं तो भाव नहीं देते लोग
अवैध निर्माण पर शाखा का तर्क : विभागों से सहयोग नहीं मिलता
प्रभारी बोले: अवैध निर्माण शाखा प्रभारी आदित्य जायसवाल ने बताया कि बन रहे मकानों का ऑन द स्पॉट निरीक्षण का निर्देश नगर आयुक्त की ओर से मिला है. निरीक्षण के बाद मकान मालिक से नक्शा मांगा जायेगा. अगर वे नक्शा नहीं देते हैं तो काम रोक कर कार्रवाई की जायेगी. इनपर जुर्माना भी लगाया जायेगा. तीन पुलिस कर्मी भी इस अभियान में साथ रहेंगे.
दिक्कत-01 : 23.5.18 को नक्शा शाखा प्रभारी गोपेंद्र कुमार घोष को नगर आयुक्त ने पत्र भेजकर दो वर्षों में पास किये गये नक्शे की सूची मांगी थी, जो आज तक नहीं मिली. नक्शा शाखा प्रभारी गोपेंद्र कुमार घोष ने बताया कि दो साल की रिपोर्ट मांगी गयी थी, जो दे दी गयी है.
दिक्कत-02 : सभी कर संग्राहक, कर दारोगा व सहायक कर दारोगा को नगर आयुक्त ने 23.5.18 को यह निर्देश दिया था कि अपने-अपने वार्ड में किये जा रहे भवन निर्माण की विस्तृत सूची अवैध निर्माण शाखा को उपलब्ध कराएं. कोई भी दारोगा या संग्राहक कोई सूची उपलब्ध नहीं करा रहा.
दिक्कत-03 : अवैध निर्माण शाखा में एक प्रभारी और सिर्फ दो कर्मचारी कार्यरत हैं. सरकार का निर्देश है कि इन्हें एक उपनिरीक्षक, दो सहायक उपनिरीक्षक, आठ सशस्त्र पुलिस और 20 डंडा पुलिस मिले. लेकिन अभी तक पुलिस जवान भी नहीं मिले हैं. इससे चाह कर भी अभियान चलाना मुश्किल हो जाता है.
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