छोटे शहरों व कस्बों की कहानी पसंद करते हैं लोग

Updated at : 06 Sep 2018 3:46 AM (IST)
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छोटे शहरों व कस्बों की कहानी पसंद करते हैं लोग

भागलपुर : अंग नगरी भागलपुर और बांका में प्रतिभाओं की भरमार है. मुंबई में फिल्म एडिटर्स का ग्रुप है. अधिकतर लोगों से जान-पहचान हो चुकी है. उनकी हिंदी और लेखन कला बहुत अच्छी है. उन्हें मायानगरी (मुंबई) में आगे बढ़ने के लिए सहयोग की जरूरत है. सभी को भरपूर सहयोग करूंगा. उक्त बातें भागलपुर के […]

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भागलपुर : अंग नगरी भागलपुर और बांका में प्रतिभाओं की भरमार है. मुंबई में फिल्म एडिटर्स का ग्रुप है. अधिकतर लोगों से जान-पहचान हो चुकी है. उनकी हिंदी और लेखन कला बहुत अच्छी है. उन्हें मायानगरी (मुंबई) में आगे बढ़ने के लिए सहयोग की जरूरत है. सभी को भरपूर सहयोग करूंगा. उक्त बातें भागलपुर के दामाद स्त्री फिल्म के युवा डायरेक्टर अमर कौशिक ने प्रभात खबर से विशेष बातचीत में कही. उन्होंने कहा कि अब लोग छोटे-छोटे शहरों व कस्बों की कहानी को फिल्मों में देखना पसंद करते हैं.

भागलपुर में लगता है अपनापन, खुद को समझता हूं बेटा : अमर कौशिक छोटी खंजरपुर की वरिष्ठ समाजसेविका विजया मोहिनी और अधिवक्ता पीपी दिवाना के दामाद हैं. अमर कौशिक मूलत: चंडीगढ़ के रहने वाले हैं. अमर कौशिक ने कहा कि भागलपुर में शादी हुई, तो पहले नलिनी नेहा का संबंध धर्मपत्नी के रूप में जुड़ा और अब भागलपुर से अधिक अपनापन लगता है. भागलपुर में आराम की जिंदगी बिताने आता हूं. मूलत: बांका के धौरैया स्थित इटहरी गांव के दामाद कौशिक यहां
छोटे शहरों व…
चार से पांच दिन रहकर भागदौड़ से दूरी बनाता हूं. यहां की अंगिका बोली बहुत अच्छी लगती है. यहां के दही और समोसा खूब याद आते हैं.
डल चादर देता है सुखद अनुभूति, तसर सिल्क को सब चाहते हैं
भागलपुर के डल चादर को गर्मी में ओढ़े बिना नहीं रहता और तसर सिल्क का कुर्ता पहनता हूं, तो महफिल में अलग दिखता हूं. दोस्त एक बार जरूर पूछते हैं कि कहां से लिया है. फिल्म शूटिंग के दौरान भी डल चादर अपने पास ही रखा था.
आवा ने दिलाया राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार
अरुणाचल प्रदेश की भाषा में 22 मिनट की फिल्म आवा ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया. बर्लिन व अमेरिका में पुरस्कार मिला. यह फिल्म रियल स्टोरी पर आधारित थी. अब लोग छोटे-छोटे शहरों व कस्बों की कहानी को फिल्म में देखना पसंद करते हैं.
समाज में फैले अंधविश्वास को मिटायेगा स्त्री
स्त्री कॉमेडी कम हॉरर फिल्म है. इस फिल्म में समाज में फैले अंधविश्वास को मिटाने का प्रयास किया गया है. मानसिक रूप से पीड़ित स्त्री को भूतनी के रूप में पेश किया गया है, जो केवल पुरुषों के साथ संबंध बनाने के लिए एक घर से एक पुरुष को डरावनी सूरत के बल पर अपने साथ ले जाती थी. इसमें चोटी कटवा की घटना पर भी चोट किया गया है.
अंग नगरी में प्रतिभाओं की भरमार मायानगरी में करूंगा भरपूर सहयोग
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