सरकारी सुविधा से वंचित हैं प्रसव पीड़िताएं

Published at :01 Mar 2017 2:14 AM (IST)
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सरकारी सुविधा से वंचित हैं प्रसव पीड़िताएं

हाल रेफरल अस्पताल का प्रसूताओं को सेनेटरी नेपकीन भी नहीं दी जाती बौंसी : रेफरल अस्पताल बौंसी इन दिनों कुव्यवस्था का शिकार बना हुआ है. अस्पताल में प्रसव पीड़िताओं के साथ भयादोहन का खेल जारी है. साथ ही इन महिलाओं को अस्पताल से मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित है. जानकारी हो कि प्रसव के […]

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हाल रेफरल अस्पताल का

प्रसूताओं को सेनेटरी नेपकीन भी नहीं दी जाती
बौंसी : रेफरल अस्पताल बौंसी इन दिनों कुव्यवस्था का शिकार बना हुआ है. अस्पताल में प्रसव पीड़िताओं के साथ भयादोहन का खेल जारी है. साथ ही इन महिलाओं को अस्पताल से मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित है. जानकारी हो कि प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्त्राव को रोकने के लिए सरकार द्वारा नि:शुल्क सेनेटरी नेपकीन प्रसूताओं को दी जाती है. जिससे प्रसूताओं को बाजार से नेपकीन नहीं खरीदना पड़ता है.
चिकित्सकों की मानें तो आमतौर पर बाजार से मिलने वाली नेपकीन से यह नेपकीन ज्यादा बेहतर होती है. अस्पताल में लेबर रजिस्टर से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एक माह में करीब ढाई सौ से तीन सौ प्रसव होता है
लेकिन उस अनुपात में नेपकीन दिया नहीं जाता है. अस्पताल के स्टोर रुम के पंजी को अगर देखा जाए तो पिछले साल जुन में एक सौ नेपकीन का उठाव सरकारी स्टाफ नर्स मंजु झा के द्वारा किया गया था. इसके बाद सातवें माह में इसका उठाव नगन्य रहा. जबकि पुन: आठवें माह में एक सौ, दसवें माह में एक सौ, ग्यारवें व बारहवें माह में भी एक एक सौ नेपकीन का उठाव किया गया था. वहीं 2017 के जनवरी माह में भी एक सौ नेपकीन का उठाव तो किया गया.
लेकिन यह नेपकीन प्रसुतिकाओं को दिया गया या नहीं यह जांच का विषय है. अगर लेबर रजिस्टर के आंकडे़ को देखा जाए तो प्रसव के हिसाब से प्रतिमाह 250 से 300 सेनेटरी नेपकीन को महिलाओं के बीच दिया जाना था. लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. सुत्रों की मानें तो यहां से नेपकीन अस्पताल में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों के द्वारा गायब कर दिया जाता है नही तो आखिर यह नेपकीन कहां जाता है. इस संबंध में जब स्टाफ मंजु झा ने पुछने पर बताया कि स्टोर से लाने के बाद नेपकीन अस्पताल की नर्स अर्चना को बांटने के लिए दिया जाता है.
वहीं जब इस बारे में अर्चना कुमारी से पुछने पर उन्होंने बताया कि नेपकीन को लेबर रुम के समीप ही स्टरलाईज बकेट में रख दिया जाता है और वहीं से सभी प्रसुतिकाओं को दिया जाता है. साथ ही ड्युटी पर तैनात नर्स के द्वारा इसे मरीजों के बीच वितरीत किया करते हैं. इसप्रकार से देखा जाय तो प्रसुतिकाओं को अस्पताल से सही तरीके से नेपकीन उपलब्ध नहीं हो पाता है और इस लाभ से मरीज वंचित रह जाते है.
कहते हैं मरीज
क्षेत्र के दुर्गापुर गांव (मायके) की प्रसव पीड़िता कंकई देवी ने बताया कि अस्पताल से उन्हें नेपकीन उपलब्ध नहीं कराया गया है. ब्रहमपुर गावं के प्रसव पीड़िता पूजा देवी पति प्रहलाद दास ने बताया कि पहले से ही बाजार से नेपकीन खरीद कर अस्पताल लाया गया है. अस्पताल से नेपकीन उपलब्ध नहीं कराया गया है.
कहते हैं रेफरल प्रभारी
रेफरल प्रभारी डा आरके सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी और इस मामले में जो भी कर्मी संलिप्त है उस पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
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