अब त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि के हाथों में होगा सैरात का कार्य

Updated at : 25 Jul 2019 7:44 AM (IST)
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अब  त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि के हाथों में होगा सैरात का कार्य

निरंजन कुमार, बांका : राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रनिधियों को एक बंफर तोहफा दिया है. पूर्व में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अंतर्गत सैरात के कार्य को अब ग्राम पंचायत, पंचायत समिति सदस्य एवं जिला परिषद सदस्य देखेंगे. जी हां हाई कोर्ट के फैसले पर राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग […]

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निरंजन कुमार, बांका : राज्य सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रनिधियों को एक बंफर तोहफा दिया है. पूर्व में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अंतर्गत सैरात के कार्य को अब ग्राम पंचायत, पंचायत समिति सदस्य एवं जिला परिषद सदस्य देखेंगे. जी हां हाई कोर्ट के फैसले पर राज्य सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अंतर्गत सैरात का कार्य अब त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधियों के जिम्मे रहेगा.

इसको लेकर राज्य पंचायती राज विभाग ने जिलाधिकारी को एक पत्र जारी कर सैरात के कार्य को त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में हस्तांतरित किये जाने निर्देश दिया है. विभागीय पत्र के आलोक में सैरातों (फेरी एवं घाट सहित) का प्रबंधन एवं अनुरक्षण संबंधी कार्य अब ग्राम पंचायत, पंसस व जिप सदस्य को दिये जाने की बात कही गयी है.
जिसके अंतर्गत अंतरजिला एवं अंतरराज्यीय सैरातों को छोड़कर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधीन संचालित सैरातों का प्रबंधन एवं अनुरक्षण का दायित्व त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया है. जिसमें ग्राम पंचायत व पंसस को नौका, फेरी और जल मार्ग के अनुरक्षण एवं जिला परिषद सदस्य को ग्रामीण पुल, तालाब, घाट, कुआं, नहर या नाली का अनुरक्षण एवं नियंत्रण के दायित्व दिये गये हैं.
ग्राम पंचायत व पंसस को नौका, फेरी व जल मार्ग के अनुरक्षण
का जिम्मा
जिला परिषद सदस्य को ग्रामीण पुल, तालाब, घाट, कुआं, नहर या नाली का अनुरक्षण व नियंत्रण के मिला दायित्व
त्रिस्तरीय पंचायत को
हस्तांतरित अधिकार
पंचायती राज संस्था बंदोबस्ती की शक्ति
ग्राम पंचायत 50 हजार तक
पंचायत समिति सदस्य एक लाख तक
जिप सदस्य पांच लाख तक
सैरात का कार्य पूर्व में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अंतर्गत था. लेकिन विभागीय पत्र के आलोक में अब यह कार्य त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया है. जिसके अंतर्गत अंतरजिला एवं अंतरराज्यीय सैरातों को छोड़कर राजस्व एवं भूमि सुधार के अधीन संचालित सैरातों का प्रबंधन एवं अनुरक्षण का दायित्व त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया है.
रंजन कुमार चौधरी, डीपीआरओ, बांका
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