भागलपुर JLNMCH में एक-एक सांस के लिए जिंदगी से जंग लड़ रही मासूम, बेटी को भर्ती कराकर गायब हुए मां-बाप

Updated at : 01 Jan 2023 1:05 PM (IST)
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भागलपुर JLNMCH में एक-एक सांस के लिए जिंदगी से जंग लड़ रही मासूम, बेटी को भर्ती कराकर गायब हुए मां-बाप

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पीजी शिशु रोग विभाग में गुरुवार को एक नवजात को भर्ती कराया गया था. बच्ची फिलवक्त करीब 10 दिन उम्र की है. उसकी बीमारी यह है कि उसका सर हर दिन एक इंच बढ़ता जा रहा है.

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संजीव, भागलपुर : रायपुर में पिछले ही महीने नवंबर में एक मार्मिक तस्वीर सामने आयी थी, जिसमें एक मां ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित अपने 13 महीने के बच्चे को सड़क किनारे फुट पंप से ऑक्सीजन दे रही थी. इस घटना के वायरल वीडियो ने हर किसी को सोचने पर विवश कर दिया था. बात जब सरकार तक पहुंची, तो उस मासूम को हर तरह की चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध करायी गयी.

भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के शिशु रोग विभाग में तस्वीर रायपुर जैसी ही है, लेकिन यहां उस नवजात बच्ची को छोड़ कर उसके माता-पिता अपने घर चले गये और एक-एक सांस के लिए जद्दोजहद कर रही मासूम बच्ची के इलाज में अस्पताल प्रशासन और चिकित्सक लगे हुए हैं. औलाद की ख्वाहिश तो माता-पिता की थी, अब वह बीमार होकर ही इस दुनिया में आयी तो इसमें उसकी गलती क्या थी.

हर दिन एक इंच बढ़ता जा रहा मासूम का सिर

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पीजी शिशु रोग विभाग में गुरुवार को एक नवजात को भर्ती कराया गया था. बच्ची फिलवक्त करीब 10 दिन उम्र की है. उसकी बीमारी यह है कि उसका सर हर दिन एक इंच बढ़ता जा रहा है. इस बच्ची को गहन चिकित्सा केंद्र में रखा गया है. बच्ची को भर्ती कराने के बाद जब उसके मधेपुरा के चौसा के रहनेवाले माता-पिता भाग गये, तो इसकी सूची वार्ड के कर्मियों ने अस्पताल प्रशासन को दी.

इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उसकी पूरी चिकित्सा व्यवस्था और देखरेख की जिम्मेदारी अपने कंधे पर ली और चिकित्सक डॉ अंकुर के अंदर चिकित्सा करने का जिम्मा सौंपा. अस्पताल अधीक्षक के निर्देश पर बच्ची का रोजाना सिटी स्कैन किया जा रहा है. अस्पताल में उपलब्ध नहीं रहने पर जरूरी दवा बाहर से मंगा कर दी जा रही है.

हाइड्रोसिफलस नाम की बीमारी से पीड़ित है बच्ची : डॉ अंकुर

बच्ची का इलाज कर रहे डॉ. अंकुर कहते हैं कि इस बच्ची को हाइड्रोसिफलस रोग हो गया है. सरल भाषा में कहें, तो मस्तिष्क के भीतर गहरी गुहाओं (निलय) में तरल पदार्थ का निर्माण हो रहा है. यह मस्तिष्क पर दबाव डालता है. इससे मस्तिष्क के उत्तकों को नुकसान पहुंच सकता है और मस्तिष्क की कई समस्याओं का कारण बन सकता है.

यह बीमारी शिशुओं और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में होती है. धीरे-धीरे बच्ची के मस्तिष्क का विकास रुक सकता है और दिव्यांग होने की संभावना रहती है. इसे ठीक करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सिर के बढ़ने की रफ्तार खतरे का संकेत दे रहा है. पीजी शिशु रोग विभाग के एचओडी डॉ केके सिन्हा कहते हैं कि बच्ची गंभीर है. रोजाना सिटी स्कैन कर स्थिति पर नजर रखी जा रही है, बीमारी को रोकने में सफलता मिल सके.

हर संभव होगी मदद, कराया जा रहा है इलाज : अधीक्षक

अस्पताल अधीक्षक डॉ एके दास इस बच्ची को देखने शनिवार को पहुंचे. इसके बारे में विस्तार से जानकारी ली. अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल में जो भी साधन है, उसके आधार पर बच्ची का इलाज कराया जा रहा है. दवा भी अस्पताल प्रशासन उपलब्ध करा रहा है. बच्ची के माता-पिता अस्पताल से चले गये हैं. उन्हें यहां रहना चाहिए था.

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