रोस्टर से पानी नहीं मिलने पर संकट गहराया
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :29 Oct 2015 7:17 AM (IST)
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कुटुंबा (औरंगाबाद) : बिहार व झारखंड के विभाजन के समय बनाये गये रोस्टर का अनुपालन नहीं होने से प्रखंड क्षेत्र में सिंचाई संकट गहरा गया है. ऐसे में प्रखंड क्षेत्र के 25 प्रतिशत से अधिक धान के पौधे पानी के बिना जल कर सूख गये हैं. किसान इसे काट कर मवेशियों के सारे के रूप […]
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कुटुंबा (औरंगाबाद) : बिहार व झारखंड के विभाजन के समय बनाये गये रोस्टर का अनुपालन नहीं होने से प्रखंड क्षेत्र में सिंचाई संकट गहरा गया है. ऐसे में प्रखंड क्षेत्र के 25 प्रतिशत से अधिक धान के पौधे पानी के बिना जल कर सूख गये हैं. किसान इसे काट कर मवेशियों के सारे के रूप में उपयोग कर रहे हैं.
25 प्रतिशत धान की फसल ऐसी है जो बाली निकलनेके बाद भी सूख रही है. यदि अभी भी सिंचाई के लिए पानी मिलता तो 50 प्रतिशत फसल बचाया जा सकता है. किसान प्रसिद्ध सिंह, धर्मेंद्र सिंह, विजय पांडेय, कृष्णा सिंह, संजय सिंह आदि ने बताया कि एक पानी के बिना फसल मारी जा रही है. फसल सूखने के साथ किसानों का हौसला टूूट रहा है और खेती उन्हें नागवार गुजर रहा है. यदि रोस्टर का अनुपालन किया जाता तो हजारों हेक्टेयर में फसल बच सकती थी.
क्या था रोस्टर : बिहार व झारखंड विभाजन के समय उत्तर कोयल नहर के लिए एक रोस्टर तैयार किया गया था. इसके अनुसार झारखंड प्रदेश को 10 प्रतिशत व बिहार को 90 प्रतिशत पानी दिया जाना था. रख -रखाव में भी इसकी तरह से 10 व 90 का अनुपात निर्धारित किया गया था. जब विगत दो माह से पानी की किल्लत हुई तो पूरा पानी झारखंड प्रदेश में ही रोक लिया गया. इससे जिले के कई प्रखंडों में सूखाड़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.
मात्र 200 क्यूसेक आ रहा पानी : महीनों से उत्तर कोयल नहर सूखा पड़ा था और जब इस संबंध में विभाग के अधिकारियों से बात होने पर वे बराज में पानी नहीं होने की बात करते थे.
पर, प्रभात खबर की टीम ने बराज का जायजा लेकर प्रमुखता से खबर छापी, तो अधिकारियों की नींद टूटी और एक-दो दिन में मुख्य नहर में अंबा डिवीजन को पानी दिया गया. समस्या यह है कि नहर में मात्र 200 क्यूसेक लगभग पानी आ रहा है. इतने पानी में सभी कैनाल में पानी नहीं छोड़ा जा सकता है.
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