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नेता जी, पधारो हमारे गांव पर आओ सिर्फ खाली पांव

Updated at : 30 Aug 2019 8:56 AM (IST)
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नेता जी, पधारो हमारे गांव पर आओ सिर्फ खाली पांव

मदनपुर : मदनपुर प्रखंड क्षेत्र के खिरियावा पंचायत में पड़ने वाले शईद बिगहा गांव में विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ है. यहां की स्थिति बदतर है. लोग नारकीय जीवन जीने को विवश है. यहां तक पहुंचने के लिए न तो सड़क है और न ही नाली व गली का निर्माण हुआ है. पिछले […]

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मदनपुर : मदनपुर प्रखंड क्षेत्र के खिरियावा पंचायत में पड़ने वाले शईद बिगहा गांव में विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ है. यहां की स्थिति बदतर है. लोग नारकीय जीवन जीने को विवश है. यहां तक पहुंचने के लिए न तो सड़क है और न ही नाली व गली का निर्माण हुआ है. पिछले कई सालों से गांव की गलियों में नाले का पानी जमा है, जिससे होकर लोग आते-जाते हैं. इस गांव की ओर न तो अधिकारी देखते हैं और नहीं नेता.

बदहाल सड़क पर जलजमाव से परेशान ग्रामीणों ने धान रोप कर विरोध जताया. ग्रामीणों का आरोप है कि गड्ढे में तब्दील सड़क के निर्माण के लिए कई बार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया. लेकिन, सड़क निर्माण की दिशा में कोई पहल नहीं की गयी. इस वजह से सड़क पर धान रोप कर विरोध जताना पड़ा.
गंदे पानी से होकर स्कूल जाते हैं बच्चे : बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र जाना हो या स्कूल गंदे पानी से होकर जाना पड़ता है. अभिभावक छोटे बच्चे को गोद में लेकर कीचड़ से पार कराते है. ग्रामीण ने बताया कि गंदगी के इस आलम ने आबादी को बीमारियों से पूरी तरह घेर रखा है. इस गांव में अधिकतर किसान व मजदूर रहते है. लेकिन गाढ़ी कमाई की मोटी रकम बीमारी पर खर्च होता है.
बारिश के दिनों में होती है अधिक परेशानी
बरसात के दिनों में गांव पहुंचने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसके साथ ही गांव में नाली गली व बिजली के साथ पेयजल की समस्या से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि सरकार ने शौचालय बनाने पर जोर दिया है, लेकिन उक्त गांव में न तो शौचालय बना है और न पानी की कोई व्यवस्था है.
क्या कहते हैं ग्रामीण
देवलानी देवी, शकुंतला देवी, शोभा देवी, पियरिया देवी, जगदीश राम, धर्मेंद्र यादव, नरेश भुइंया, कामेश्वर भुइंया, अखिलेश कुमार आदि का कहना था कि सड़क की ईंट सोलिंग व पक्की करण के लिए हम लोग पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक अनेक बार गुहार लगाकर थक चुके हैं.
परंतु, उनके कानों पर आज तक जूं नहीं रेंग पाई है. वोट लेने के लिए गांव-गांव की खाक छानने वाले जनप्रतिनिधि काश इस बरसात के मौसम में यहां आते तो उन्हें विकास के इस रूप से रू-ब-रू होते और पता चलता कि चुनाव के वक्त लंबे-लंबे दावे करने वालों का विकास धरातल पर कितना है. फिलहाल इस गांव की सैकड़ों परिवार नारकीय जिंदगी जीने को विवश है.
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