जितना पैसा,उतनी बिजली
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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स्कीम . रेवेन्यू लिंक सर्विस सप्लाई के आधार पर बिजली आपूर्ति बिजली विभाग अब शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के बिल अदा करने की सक्रियता के आधार पर बिजली उपलब्ध करायेगी. प्राप्त राजस्व के आधार पर ही निर्धारित किया जायेगा कि उपभोक्ता 24 घंटे में कितने घंटे बिजली प्राप्त करना चाहते हैं. अररिया : […]
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स्कीम . रेवेन्यू लिंक सर्विस सप्लाई के आधार पर बिजली आपूर्ति
बिजली विभाग अब शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के बिल अदा करने की सक्रियता के आधार पर बिजली उपलब्ध करायेगी. प्राप्त राजस्व के आधार पर ही निर्धारित किया जायेगा कि उपभोक्ता 24 घंटे में कितने घंटे बिजली प्राप्त करना चाहते हैं.
अररिया : जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति के लिए विभाग अब नयी तरकीब अपना रहा है. इसके आधार पर 24 घंटों में कितने घंटे उपभोक्ता बिजली सेवा का लाभ प्राप्त करना चाहते हैं. यह पूरी तरह उपभोक्ताओं पर ही छोड़ दिया गया है. क्षेत्र विशेष में बिजली की सप्लाई वहां से प्राप्त होने वाले राजस्व पर निर्भर करेगा. जिस क्षेत्र के उपभोक्ता बकाया बिजली बिल के भुगतान के प्रति जितने सजग व गंभीर होंगे उन्हें विद्युत सेवाओं का लाभ भी उतने अधिक समय तक प्राप्त हो सकेगा.
विद्युत विभाग द्वारा अपनायी गयी इस नयी व्यवस्था को रेवेन्यू लिंक सर्विस सप्लाई का नाम दिया गया है. इसके तहत विद्युत आपूर्ति से जिले को प्रति माह प्राप्त होने वाले राजस्व के आधार पर ही जिले को बिजली की आपूर्ति की जायेगी. फिर क्षेत्रवार प्राप्त होने वाले राजस्व के आधार पर इसका वितरण किया जायेगा.
बेहतर सेवा के लिए ससमय करें बिल का भुगतान : बिजली आपूर्ति के लिए नयी व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ताओं द्वारा ससमय बिल के भुगतान का महत्व बढ़ गया है. ऐसा इसलिए की समय पर बकाये बिल का भुगतान नहीं किये जाने से विभागीय राजस्व में कमी आयेगी. इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को ही चुकाना पड़ेगा. विभाग उपभोक्ताओं की जरूरत के हिसाब से बिजली की खरीदारी नहीं कर पायेगा. नतीजतन उपभोक्ताओं को कम समय के लिए ही बिजली उपलब्ध हो सकेगा. गौरतलब है कि फिलहाल जिले में तकरीबन दो लाख विद्युत उपभोक्ता हैं. विद्युत खपत के आधार पर प्रति माह विभाग को नौ करोड़ का राजस्व प्राप्त होना चाहिए.
इस अनुपात में विभाग को प्रतिमाह औसतन पांच करोड़ से छह करोड़ का राजस्व ही प्राप्त हो पाता है. प्रति माह प्राप्त होने वाले राजस्व में शहरी क्षेत्र की हिस्सेदारी ज्यादा है. इसलिए शहरी क्षेत्र में हर दिन लगभग 22 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है. विभाग को प्राप्त होने वाले राजस्व में ग्रामीण क्षेत्रों का योगदान काफी कम है. इसलिए ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को लगातार पावर कट की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. एक अनुमान के मुताबिक जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे या इससे कम समय के लिए ही बिजली की आपूर्ति संभव हो पा रही है.
क्या है रेवेन्यू िलंक सर्विस सप्लाई
जिले को विद्युत आपूर्ति करने वाली कंपनी नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड पावर सप्लाई के लिए नयी स्कीम पर काम कर रहा है. इस नयी स्कीम को आरएलएसएस नाम दिया गया है. इस नये स्कीम के तहत जिले को प्राप्त होने वाली बिजली पूरी तरह विभाग द्वारा कंपनी को प्रति माह अदा की गयी राशि पर निर्भर होगा. अगर विद्युत विभाग एक माह में पांच करोड़ रुपये कंपनी को अदा करती है, तो उस माह इतने मूल्य की बिजली ही कंपनी विभाग को उपलब्ध करायेगा. जाहिर है इस नयी व्यवस्था के तहत जिले को प्राप्त होने वाली बिजली पूरी तरह विद्युत आपूर्ति से प्रति माह विभाग को प्राप्त होने वाले राजस्व पर निर्भर करेगा.
नयी व्यवस्था के तहत बिजली उपभोक्ताओं को समय करना होगा बिल का भुगतान
बकाया रहने पर कटेगा बिजली कनेक्शन
नये स्कीम को प्रभावी बनाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है. बकाये बिल के मामले में विभाग सख्ती बरत रहा है. बिल भुगतान में एक माह की देरी होने पर भी कनेक्शन काटे जा रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्र में कुछ स्थानीय कारणों से सख्ती कारगर साबित नहीं हो रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा बिल बकाया होने की स्थिति में ट्रांसफारमर से ही संबंधित क्षेत्र का कनेक्शन काट दिये जाने का विभागीय आदेश प्राप्त है. इसे धीरे-धीरे अमल में लाया जा रहा है.
अक्षय कुमार िसन्हा, सहायक विद्युत अभियंता, अररिया
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