कृषि यंत्र की कालाबाजारी का संदेह

दिघलबैंक: प्रखंड मुख्यालय परिसर में बने कृषि गोदाम से करीब सैकड़ों पीस कोनीविडर यंत्र जो धान के खेेत से घास निकालने की यंत्र है को एक मैजिक वाहन बीआर11एल-9373 मंे भरकर कर बाहर ले जाया जा रहा था. प्रखंड मुख्यालय में मौजूद उपप्रमुख असद जहां की नजर सैकड़ों कोनीविडर लदे मैजिक वाहन पर पड़ी तो […]
दिघलबैंक: प्रखंड मुख्यालय परिसर में बने कृषि गोदाम से करीब सैकड़ों पीस कोनीविडर यंत्र जो धान के खेेत से घास निकालने की यंत्र है को एक मैजिक वाहन बीआर11एल-9373 मंे भरकर कर बाहर ले जाया जा रहा था. प्रखंड मुख्यालय में मौजूद उपप्रमुख असद जहां की नजर सैकड़ों कोनीविडर लदे मैजिक वाहन पर पड़ी तो उन्होंने वाहन चालक को रूकने का इशारा किया तब तक चालक मैजिक छोड़ फरार हो गया. चालक जब भागने लगा तो उप प्रमुख को संदेह हुआ. उन्होंने इसकी सूचना दिघलबैंक थाना को दी. सूचना के बाद मौके पर पहुंचे दिघलबैंक थाना के अनि धमेंद्र कुमार एवं नितेश चौधरी ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी. वहीं दिन दहाड़े इस तरह की घटना की खबर सुन तुलसिया मुखिया रिजवान अहमद भी प्रखंड कार्यालय पहुंचे. उन्होंने बताया कि सरकारी अनुदान वाले इस यंत्र को श्रीविधि के चयनित किसानों के बीच वितरण करना था. परंतु किसानों को यह यंत्र न देकर कालाबाजारी के उद्देश्य से अन्यत्र ले जाया जा रहा था. वाहन पर लदे यंत्र की अनुमानित कीमत लाखों रुपये आंकी गयी है. समाचार प्रेषण तक दिघलबैंक पुलिस द्वारा मामले की जांच जारी थी.
क्या कहते है कृषि पदाधिकारी
जिला कृषि पदाधिकारी अनिल कुमार यादव ने बताया कि चार सौ रुपया लेकर प्रति किसान जो श्रीविधि के लिए चयनित है उनको देना था. मगर किसान द्वारा यंत्र नहीं लिये जाने के कारण यंत्र विक्रेता इसे वापस ले जा रहे थे. उन्होंने कालाबाजारी के किसी भी मामले से इंकार किया है.
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