शौचालय की राशि सीधे लाभुकों को

Published at :05 Jul 2014 1:32 AM (IST)
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शौचालय की राशि सीधे लाभुकों को

पटना: मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण की राशि सीधे लाभुकों को दी जाये. इस वित्तीय वर्ष में 20 लाख परिवारों में व्यक्तिगत शौचालय का निर्माण कराना है. इसके लिए हर पंचायत को चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की ढाई लाख की राशि उपलब्ध करायी गयी है. यह […]

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पटना: मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण की राशि सीधे लाभुकों को दी जाये. इस वित्तीय वर्ष में 20 लाख परिवारों में व्यक्तिगत शौचालय का निर्माण कराना है.

इसके लिए हर पंचायत को चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की ढाई लाख की राशि उपलब्ध करायी गयी है. यह रिवॉल्विंग फंड के रूप में काम करेगी. इससे लाभुकों को शौचालय निर्माण के लिए अग्रिम दी जायेगी. इंदिरा आवास के तर्ज पर शौचालय निर्माण की राशि देने का निर्देश उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग व लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को दिया. मुख्यमंत्री शुक्रवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आयोजित ‘स्वच्छ बिहार’ कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने इस वित्तीय वर्ष में हर पंचायत में दो सौ शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया. उन्होंने कहा कि महादलित विकास मिशन के तहत लाभुक को 900 रुपये दिये जाते हैं. अब एक हजार रुपये मिलेंगे. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अपील की कि वे स्वच्छता को महत्वपूर्ण मानते हुए गंभीर प्रयास करें. संपूर्ण स्वच्छता का लक्ष्य हासिल करना सामान्य बात नहीं है. यह काम 80-85 फीसदी गरीब लोगों के लिए है. किसी भी परिवार में शौचालय नहीं होने से तरह-तरह की बीमारियां फैलती हैं. इसके साथ पौधारोपण अभियान भी महत्वपूर्ण है. उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित 13 लाख परिवारों के लक्ष्य को 20 लाख ले जाने का निर्देश दिया.

राशि की कमी नहीं : ग्रामीण विकास मंत्री नीतीश मिश्र ने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए राशि की कमी नहीं है. इसके लिए हर परिवार को 10 हजार रुपये दिये जा रहे हैं. बिहार को खुले में शौच से मुक्ति के लक्ष्य को हर हाल में हासिल करना है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जब भी कार्यालय में हों, तो आनेवाले जनप्रतिनिधियों से इस संबंध में बात करें. योजनाओं की जानकारी दें. किसी घर में शौचालय न होना, सिर्फ स्वच्छता का सवाल नहीं है, बल्कि महिलाओं की अस्मिता का भी है. ग्रामीण क्षेत्रों में दुष्कर्म के अधिसंख्य मामलों इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि उनके घरों में शौचालय नहीं है.

खुले शौच से मुक्ति के मामले में बिहार को मॉडल बनना चाहिए : पीएचइडी मंत्री महाचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि खुले में शौच से मुक्ति के मामले में बिहार को देश का मॉडल पेश करना चाहिए. वर्ष 2022 तक खुले में शौच से मुक्ति का लक्ष्य रखा गया है. महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ पर 2019 तक इस लक्ष्य को पूरा कर लिया जाना चाहिए.

मौके पर कृषि विभाग के प्रधान सचिव सह मुख्यमंत्री के ओएसडी अमृत लाल मीणा, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव एसएम राजू, पीएचइडी की सचिव अंशुली आर्या, मनरेगा आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, नेपाल से आये पीएचइडी के पदाधिकारी अवध किशोर मिश्र, पूर्व आइएएस अधिकारी आइसी कुमार आदि मौजूद थे.

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