पटना : भारत व नेपाल जल्द ही रेललाइन से जुड़ जायेंगे. विदेश मंत्रालय द्वारा कम आवंटित राशि इस मार्ग का सबसे बड़ा रोड़ा बनी हुई थी. इस अवरोध को दूर करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों व भूमि सुधार व राजस्व विभाग के प्रधान सचिव हुकुम सिंह मीणा आदि की एक बैठक हुई.
बैठक में विदेश मंत्रालय निदेशक अनिल कुमार राय, सचिव अभय कुमार ठाकुर व संजीव रंजन मौजूद थे. दरअसल, अररिया जिला के जोगबनी होते हुए नेपाल के विराट नगर और मधुबनी के जयनगर से जनकपुर पुर तक के रेललाइन बिछाने के लिए विदेश मंत्रालय द्वारा आवश्यकता से कम धन आवंटित किया गया है.
प्रधान सचिव हुकुम सिंह मीणा के अनुसार, जोगबनी से विराट नगर तक रेल नेटवर्क निर्माण के लिए लगभग 64 एकड़ जमीन की आवश्यकता है. लेकिन, इसके लिए मंत्रालय द्वारा चालू वित्त वर्ष में 65 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं, जबकि 150 करोड़ रुपये की जरूरत है. इसी तरह जयनगर से जनकपुर रेल संपर्क स्थापित करने के लिए लगभग 6 एकड़ जमीन की जरूरत है. लेकिन, जमीन अधिग्रहण के लिए जरूरी 8 करोड़ रुपये के एवज में मंत्रालय ने 5 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है.
* राशि देने में असमर्थता : विदेश मंत्रालय द्वारा असमर्थता जाहिर करने के बाद बैठक में सहमति बनी कि फिलहाल चालू वित्त वर्ष में केवल रेल लाइन बिछाने के लिए ही जमीन का अधिग्रहण किया जाये. शेष काम जैसे यार्ड व लूप लाइन आदि बनाने के लिए भूमि का बाद में अधिग्रहण किया जायेगा. फिलहाल इन दोनों रेल लाइनों पर मालगाड़ी चलाने की योजना है.
नेपाल सरकार द्वारा अपने हिस्से का जमीन पहले ही मुहैया करा चुकी है. अररिया जिले में रेललाइन के लिए जमीन उपलब्ध है. जबकि, मधुबनी में प्रस्तावित रेल लाइन के रास्ते में आबादी और दूसरे निर्माण के कारण भूमि अधिग्रहण में थोड़ा परिवर्तन करना होगा.