Indira Ekadashi 2021: पितृ पक्ष में इस दिन है इंदिरा एकादशी, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरुरी बातें

Updated at : 30 Sep 2021 2:45 PM (IST)
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Indira Ekadashi 2021: पितृ पक्ष में इस दिन है इंदिरा एकादशी, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरुरी बातें

Indira Ekadashi 2021: इस समय पितृपक्ष चल रहा है. पितृ पक्ष में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है. अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है.

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Indira Ekadashi 2021: इस समय पितृपक्ष चल रहा है. पितृ पक्ष में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है. अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है. एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है. इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है. वहीं, मान्यता है कि इस दिन धर्मपरायण राजा इंद्रसेन ने पितर लोक में अपने पिता की मुक्ति दिलाने के लिए व्रत और पूजन किया था. उस दिन से इंदिरा एकादशी का महत्व बढ़ गया है. वहीं, जिन लोगों की कुण्डली में पितृदोष होता है, उन्हें इंदिरा एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए.

पंचांग के अनुसार इस साल इंदिरा एकादशी का व्रत 02 अक्टूबर, दिन शनिवार को रखा जाएगा. इंदिरा एकादशी का व्रत पितृ पक्ष में पड़ता है. इंदिरा एकादशी का व्रत दशमी तिथि से शुरू हो जाती है. यह व्रत विशेष रूप से अपने पूर्वजों, की मुक्ति के लिए रखा जाता है. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के दिन किया जाता है. इंदिरा एकादशी के व्रत के पहले दशमी तिथि को सूर्यास्त से पहले भोजन कर लेना चाहिए.

इंदिरा एकादशी 2021 शुभ मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारम्भ 01 अक्टूबर 2021 की शाम 11 बजकर 03 मिनट पर

  • एकादशी तिथि समाप्त 02 अक्टूबर 2021 की रात 11 बजकर 10 मिनट पर

  • इंदिरा एकादशी पारण का समय 03 अक्टूबर 2021 की सुबह 06 बजकर 15 मिनट से 08 बजकर 37 मिनट तक

एकादशी व्रत पूजा विधि

भगवान शालिग्राम आसन स्थापिग करने से पहले गंगा जल से स्नान कराएं. इसके बाद उन्हें धूप,घी ,हल्दी,दीप, फल और फूल भगवान को अर्पित करना चहिए. फिर इंदिरा एकादशी व्रत की कथा का पाठ करना चाहिए. पितरों की मुक्ति के लिए इस दिन गरूण पुराण या गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें.

इसके बाद भगवान विष्णु की आरती करें. यदि इस दिन श्राद्ध हो तो पितरों के लिए थोड़ा भोजन बना कर घर की दक्षिण दिशा में जरूर रखें. इस दिन विष्णु सहस्रनाम और विष्णु सतनाम स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं. इसके बाद गाय, कौए को भोजन कराएं. ऐसा करने पर पितरों को मुक्ति मिलती है.

Posted by: Radheshyam Kushwaha

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