मुक्ति का ज्ञान ही है सच्ची विद्या : बीके शीलू दीदी

Updated at : 22 Nov 2018 2:27 PM (IST)
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मुक्ति का ज्ञान ही है सच्ची विद्या : बीके शीलू दीदी

कोलकाता : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, माउंट आबूके ध्यान व रोजयोग की अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञ ब्रह्माकुमारी शीलू दीदी ने कहा कि विद्या वही है, जो दु:ख, रोग, कष्ट, तनाव और अवसाद से मुक्ति दे. समस्याओं से मुक्त करे. जीवन मुक्ति का ज्ञान ही सच्ची विद्या है. जीवन मुक्ति का ज्ञान केवल भगवान ही दे सकता […]

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कोलकाता : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, माउंट आबूके ध्यान व रोजयोग की अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञ ब्रह्माकुमारी शीलू दीदी ने कहा कि विद्या वही है, जो दु:ख, रोग, कष्ट, तनाव और अवसाद से मुक्ति दे. समस्याओं से मुक्त करे. जीवन मुक्ति का ज्ञान ही सच्ची विद्या है. जीवन मुक्ति का ज्ञान केवल भगवान ही दे सकता है.

दो दिवसीय दौरे पर कोलकाता पहुंचीं बीके शालू दीदी ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बारानगर शाखा द्वारा आयोजित परिचर्चा में ये बातें कहीं. शीलू दीदी ने कहा कि देश में बहुत सारे ऐसे कॉलेज और विश्वविद्यालय हैं, जो डॉक्टर और इंजीनियर बनाते हैं, लेकिन कोई ऐसी संस्था नहीं, जो मानव को महामानव बनाता है.

उन्होंने कहा कि देश और विदेश में फैले प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय की विभिन्न शाखाओं में मूल्यों की शिक्षा दी जाती है. जीवन जीने की कला सिखायी जाती है. विश्वविद्यालय में धन नहीं, जीवन मूल्य कमाने और जीवन जीने की कला सिखायी जाती है. उन्होंने कहा कि विश्व में जात-पांत, धर्म और भाषा का भेदभाव बढ़ रहा है. ईश्वरीय विश्वविद्यालय विश्व शांति और सौहार्द के लिए निरंतर कार्य कर रहा है.

उन्होंने कहा कि दुनिया में लोग देह अभिमानी हैं. कहा गया है कि ब्रह्म सत्य है और जग मिथ्या. उसी तरह से आत्मा सत्य है और देहाभिमान मिथ्या. सब कुछ नष्ट हो जाता है, लेकिन चेतना कभी नष्ट नहीं होती. ईश्वरीय विश्वविद्यालय का उद्देश्य मानव को अंधकार से निकाल कर उजाला में लाना है और ज्ञान का प्रकाश देकर शक्तिहीन आत्मा को परमात्मा के समीप पहुंचाना है. जब तक देह से मोह रहेगा, कोई परमात्मा से नहीं जुड़ सकता.

शीलू दीदी ने कहा कि आत्मा का ज्ञान ही स्वाभाविक ज्ञान है. आज प्राय: ही ऐसे वाकये सुनने को मिलते हैं कि मां ने बच्चे को डांटा और बच्चे ने अपने जीवन का अंत कर लिया. सहनशक्ति के अभाव के कारण ही इस तरह की घटनाएं घटती हैं. राजयोग और ध्यान से न केवल तनाव से मुक्ति मिलती है, वरन व्यक्ति को सहनशील और शांत भी बनाता है.

उन्होंने कहा कि देश व समाज को बदलने के लिए जरूरी है कि पहले खुद को बदला जाये. खुद के बदलाव से ही देश और समाज के बदलाव के रास्ते निकलते हैं. इस अवसर पर बीके भाई-बंधुओं ने गीत संगीत भी प्रस्तुत किया. गुरुवारको दोपहर में बीके शालू दीदी ने गुरुनानक फार्मेंसी इंस्टीट्यूट में छात्रों को ध्यान और राजयोग का पाठ पढ़ाया. बारानगर शाखा की प्रभारी बीके किरण, बीके पिंकी सहित अन्यने बीके शीलू दीदी का स्वागत किया. शाम को बारानगर सस्थित भवन स्थित कार्यक्रम में शामिल होंगी.

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