खेती की नयी राह

Updated at : 20 Jan 2016 6:39 AM (IST)
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खेती की नयी राह

प्रधानमंत्री ने ठीक कहा है कि सिक्किम के किसानों की सीख से खेती की तसवीर बदलेगी और केवल देश ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए यह राज्य जैविक खेती का अग्रदूत बनेगा. सिक्किम की सरकार ने 12 साल पहले घोषणा की थी कि राज्य में खेतिहर उत्पादन को पूर्ण रूप से जैविक रीति वाला बनाना […]

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प्रधानमंत्री ने ठीक कहा है कि सिक्किम के किसानों की सीख से खेती की तसवीर बदलेगी और केवल देश ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए यह राज्य जैविक खेती का अग्रदूत बनेगा. सिक्किम की सरकार ने 12 साल पहले घोषणा की थी कि राज्य में खेतिहर उत्पादन को पूर्ण रूप से जैविक रीति वाला बनाना है.

प्रदेश सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की जानी चाहिए कि वादे के मुताबिक सिक्किम अब देश का पहला जैविक कृषि वाला राज्य घोषित हो गया है. पर्वतीय राज्य सिक्किम में खेती-बाड़ी की स्थितियां बहुत कठिन हैं. राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र के मात्र 11 प्रतिशत हिस्से में ही खेती होती है, जबकि यहां 65 प्रतिशत लोग जीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं. राज्य की खेतिहर जमीन का मात्र 5 प्रतिशत हिस्सा ही सिंचाई की सुविधा वाला है, 95 प्रतिशत हिस्से पर खेती बारिश पर निर्भर है.

विषम तापमान और ऊंचाई संबंधी प्राकृतिक बाधाओं के अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा से हीन होने के बावजूद अगर सिक्किम अपनी 50 हजार हेक्टेयर कृषि-भूमि को जैविक खेती के लिए जरूरी प्रमाणन के दायरे में लाते हुए इसकी शर्तें पूरी कर पाया है, तो इसे सिक्किम के किसानों की उस जीवन-दृष्टि की जीत समझा जाना चाहिए जो खेती, प्रकृति और मनुष्य के जीवन के बीच एक आंतरिक संबंध देखता है और इसकी रक्षा करता है. रासायनिक उर्वरक, कीट तथा खर-पतवार नाशक दवाइयों के सहारे होनेवाली खेती के खतरे विश्व निरंतर महसूस कर रहा है.
जमीन के अनुर्वर होते जाने के अलावा रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में सालाना सवा दो लाख लोगों की मृत्यु कीटनाशकों के उपयोग के कारण होती है. इन मौतों का मात्र एक प्रतिशत हिस्सा विकसित देशों से संबंधित है. इस तथ्य के आधार पर भारत जैसे देशों की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है, जहां कीटनाशकों का उत्पादन 1960 के पांच हजार मीट्रिक टन से बढ़ कर अब एक लाख मीट्रिक टन हो गया है. विश्व में जैविक कृषि-उत्पादों की भारी मांग है और भविष्य में जैविक उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं को बढ़ते ही जाना है.
विश्व में जैविक खाद्य-पदार्थों का बाजार 60 अरब डॉलर का है और दुनिया में कुल तीन करोड़ 30 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती होती है. वनोत्पादों को छोड़ दें, तो भारत में 2010 में 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र ही जैविक खेती के दायरे में आ पाया है. उम्मीद है कि शेष भारत को सिक्किम की ही तरह जैविक खेती की राह पर लाने के लिए अागामी बजट में कुछ विशेष उपाय किये जायेंगे.
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