सिलिकन वैली में मोदी

Published at :15 Sep 2015 6:07 AM (IST)
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सिलिकन वैली में मोदी

डिजिटल तकनीक के बिना विकास और समृद्धि की परिकल्पना असंभव है. इस तथ्य पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछले कई वर्षों से जोर देते रहे हैं. सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी लंबे अरसे से सक्रिय हैं. फेसबुक, ट्विटर और निजी वेबसाइट के साथ-साथ वे आधिकारिक प्रोफाइलों और वेबसाइटों के जरिये भी अपनी नीतियों और कार्यक्रमों […]

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डिजिटल तकनीक के बिना विकास और समृद्धि की परिकल्पना असंभव है. इस तथ्य पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पिछले कई वर्षों से जोर देते रहे हैं. सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी लंबे अरसे से सक्रिय हैं.

फेसबुक, ट्विटर और निजी वेबसाइट के साथ-साथ वे आधिकारिक प्रोफाइलों और वेबसाइटों के जरिये भी अपनी नीतियों और कार्यक्रमों के संबंध में लोगों के सुझावों से अवगत होते रहते हैं. डिजिटल माध्यम उनके लिए सिर्फ राजनीति का जरिया भर नहीं है, बल्कि वे इसे सुशासन का आधार बनाने के लिए प्रयासरत हैं. उनकी इसी सोच का परिणाम है ‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम’, जिसमें देश के कोने-कोने तक इंटरनेट के विस्तार का लक्ष्य रखा गया है.

इस संदर्भ में इस महीने अमेरिका यात्रा के दौरान उनका सिलिकन वैली जाने का कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है. मोदी इस दौरान इंटरनेट की दो बड़ी कंपनियों- गूगल और फेसबुक- के मुख्यालयों में जाने के साथ-साथ वहां विभिन्न कंपनियों के उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श भी करेंगे. गूगल की सेवाएं इंटरनेट की गतिविधियों का आधार हैं और फेसबुक की सोशल मीडिया के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपस्थिति है.

बड़ी संख्या में भारतीय उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देने के अलावा सिलिकन वैली की कंपनियां ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम में निवेश और भागीदारी द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री का वहां जाना उम्मीदों से लबरेज मौका है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत ने भी तकनीकी विकास में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है तथा अमेरिका समेत दुनिया के अन्य इलाकों में सूचना क्रांति में भारतीय मूल के विशेषज्ञों, उद्यमियों और कंप्यूटर इंजीनियरों की बड़ी भूमिका रही है.

सिलिकन वैली में प्रधानमंत्री के आगमन पर उत्साह का माहौल इस महत्व को रेखांकित करता है. पिछले कुछ समय से भारत में भी मोबाइल तकनीक पर आधारित नव-उद्यमों और इ-कॉमर्स का तेजी से विस्तार हुआ है, पर इसे अपेक्षाओं और संभावनाओं की दृष्टि से बहुत संतोषजनक नहीं कहा जा सकता है. हालांकि, स्थिति को बेहतरी के लिए सरकार ने कुछ उल्लेखनीय कदम उठाये हैं.

पिछले बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक हजार करोड़ रुपये का विशेष कोष नव-उद्यमों के लिए आवंटित किया है. ऐसे कोष की स्थापना का प्रयास सराहनीय है. सरकार ने अपने वित्तीय संस्थाओं और बैंकों को यह निर्देश भी जारी किया है कि वे नव-उद्यमों और नवोन्मेषी उपक्रमों के लिए युवाओं को ॠण देने की प्रक्रिया को सरल बनाएं और ऐसे प्रयासों के प्रति अपनी परंपरागत प्रवृत्ति में बदलाव लाएं. प्रधानमंत्री ने स्त्रियों और समाज के वंचित वर्ग के युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने की बात भी कही है. युवा प्रतिभाओं और नये विचारों से ही सूचना तकनीक का विस्तार संभव है.

देश की प्रतिभाएं, देश में रह कर ऐसे नवोन्मेष सामने लाएं जो दुनिया में अपनी जगह बना सके, यह सपना तभी पूरा होगा, जब प्रतिभाओं को सरकारी, संस्थागत और आर्थिक स्तर पर अनुकूल माहौल और मदद मिले. उम्मीद है कि जब प्रधानमंत्री सिलिकन वैली में गूगल, फेसबुक और अन्य कंपनियों के युवा प्रमुखों और विशेषज्ञों से मिलेंगे, तो इससे भारतीय प्रतिभाओं को भी प्रेरणा मिलेगी तथा सहभागिता की नयी संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे.

मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान गंभीर राजनीतिक बैठकों और मुलाकातों के अनेक कार्यक्रम हैं. कूटनीति के संदर्भ में इन कार्यक्रमों का बहुत महत्व है. परंतु, प्रधानमंत्री ने सिलिकन वैली जाने और तकनीकी कंपनियों से बात करने का निर्णय लेकर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि उनकी नीतियों और योजनाओं में तकनीक भी प्राथमिकताओं में है.

यह भी उल्लेखनीय है कि तकनीक ने सेवाओं और सुविधाओं को सुगम और सस्ता ही नहीं बनाया है, बल्कि अनेक देशों और महादेशों में बंटी दुनिया को एक विश्व-ग्राम बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभायी है. इसने विकसित, विकासशील और अविकसित समाजों के युवाओं की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और आवश्यकताओं को नयी दृष्टि दी है, उन्हें संतुलित किया है तथा यह भरोसा दिलाया है कि सहभागिता से समस्याओं के समाधान की राह निकल सकती है.

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुखिया और सोशल मीडिया की सबसे बड़ी पहल के प्रमुख के साथ संवाद निश्चित रूप से दिलचस्प होगा. यह दो पीढ़ियों, दो किनारों और दो भिन्न क्षेत्रों के बीच संवाद भी होगा, जिनका लक्ष्य एक बेहतर समावेशी विश्व का निर्माण है.

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