अपनी हार स्वीकार करे कांग्रेस

बीते छह दशक से देश पर शासन करनेवाली कांग्रेस यह मानने के लिए तैयार क्यों नहीं है कि आज का जनादेश यहां के युवा तय करते हैं? वह क्यों नहीं जनादेश का सम्मान करते हुए हार स्वीकार करने की हिम्मत जुटा रही है? जैसे घर के बुजुर्ग, युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं, उसी तरह कांग्रेस […]
बीते छह दशक से देश पर शासन करनेवाली कांग्रेस यह मानने के लिए तैयार क्यों नहीं है कि आज का जनादेश यहां के युवा तय करते हैं? वह क्यों नहीं जनादेश का सम्मान करते हुए हार स्वीकार करने की हिम्मत जुटा रही है?
जैसे घर के बुजुर्ग, युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं, उसी तरह कांग्रेस को भी देशहित में युवा भारत के जनादेश का सम्मान करना चाहिए. लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर सत्ता से दूर होने के बाद कांग्रेस बौखला क्यों रही है? एक लंबे समय के बाद जनता ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का काम किया है. पूरा विपक्ष एक होकर सिर्फ विकास में बाधक बन सकता है.
सदन में हाय-तौबा मचा सकता है, लेकिन वह सरकार को सत्ता से बेदखल नहीं कर सकते. भले ही देश के विकास में कांग्रेस का योगदान रहा हो, लेकिन अब उसे हार स्वीकार कर लेनी चाहिए.
संतोष कुमार, जमशेदपुर
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