ऐसे संगठनों को खारिज करें

Published at :14 Aug 2014 1:15 AM (IST)
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ऐसे संगठनों को खारिज करें

रांची में एक अप्रिय घटना घटी. एनएसयूआइ के छात्र नेता कुमार राजा ने एमबीए विभाग के कोऑर्डिनेटर डॉ एके चट्टोराज पर जूता फेंका. क्योंकि छात्र नेता की शिक्षिका पत्नी का वेतन कट गया था. यह बेहूदा हरकत है. राजा जिस एनएसयूआइ से संबंधित हैं, वह राष्ट्रीय संगठन है. कांग्रेस पार्टी का छात्र संगठन है. इस […]

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रांची में एक अप्रिय घटना घटी. एनएसयूआइ के छात्र नेता कुमार राजा ने एमबीए विभाग के कोऑर्डिनेटर डॉ एके चट्टोराज पर जूता फेंका. क्योंकि छात्र नेता की शिक्षिका पत्नी का वेतन कट गया था. यह बेहूदा हरकत है. राजा जिस एनएसयूआइ से संबंधित हैं, वह राष्ट्रीय संगठन है.

कांग्रेस पार्टी का छात्र संगठन है. इस संगठन के राष्ट्रीय स्तर (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं राजा) के पदाधिकारी अगर ऐसी हरकत करें, तो इससे पूरा संगठन राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम होता है. राजा की इस हरकत का समर्थन कोई भी सभ्य समाज, संगठन नहीं कर सकता.

यहां तक कि कांग्रेस या एनएसयूआइ भी इस मुद्दे पर राजा जैसे नेता का साथ नहीं दे सकते. लेकिन, इतना काफी नहीं है. कांग्रेस और एनएसयूआइ को इस घटना का विरोध करने के लिए सामने आना चाहिए. नेताओं पर समाज को दिशा देने की जिम्मेवारी होती है और अगर वही अपने हित में शिक्षकों को प्रताड़ित करने लगें, जूता फेंकने लगें, तो विरोध होना ही चाहिए. छात्र नेता की पत्नी हो या किसी अन्य बड़े अफसर की, नियम तो नियम होता है, इसे तोड़ने का अधिकार किसी को नहीं है. अगर नेता की पत्नी शिक्षिका हैं और अनुपस्थित रहने पर वेतन कटने का प्रावधान है, तो वेतन कटेगा ही.

यह कैसे संभव है कि एक नेता की पत्नी के लिए नियम बदल जाये? जिस दिन चेहरा देख कर, भय व गुंडागर्दी के कारण नियम बदले जाने लगे, उस दिन विश्वविद्यालय खत्म हो जायेगा. शिक्षक का अपना महत्व है, उनका सम्मान किया जाना चाहिए. उनके साथ मारपीट असभ्य समाज ही कर सकता है. इसलिए अगर छात्र नेता ने जूता फेंका है, तो यह दंडनीय अपराध है. यह दंड समाज देता है. ऐसे नेताओं को अगर पार्टी (जिस पार्टी में ऐसे लोग होते हैं) शह दे, तो उस पार्टी का भी बंटाधार तय होता है. कांग्रेस पार्टी का अपना गौरवमयी इतिहास रहा है. अगर उसी पार्टी के छात्र संगठन में ऐसे उद्दंड नेता हों, तो पार्टी रसातल में चली जायेगी. यह कांग्रेस के हित में है कि ऐसे जो भी मामले आते हैं, उसमें अनुशासनात्मक कार्रवाई करे. लेकिन इसके लिए हिम्मत चाहिए. सिर्फ एनएसयूआइ ही क्यों, किसी भी दल या कोई भी छात्र संगठन का नेता अगर ऐसी हरकत करता है, तो उसे नकार देना चाहिए. यही सभी के हित में होगा.

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