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  • Jul 23 2019 1:34AM
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फिर पाकिस्‍तान ने छेड़ा कश्‍मीर का राग, अमेरिका में उठाया मुद्दा, ट्रंप बोले- मध्यस्थता को तैयार, भारत का इनकार

फिर पाकिस्‍तान ने छेड़ा कश्‍मीर का राग, अमेरिका में उठाया मुद्दा, ट्रंप बोले- मध्यस्थता को तैयार, भारत का इनकार
वाशिंगटन : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोमवार को अमेरिकी  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की. इमरान खान और ट्रंप के बीच लंबी बातचीत भी हुई. इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने कश्मीर का मुद्दा उठाया. जिसपर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश कर दी. उन्‍होंने कहा कि यदि दोनों देश कहेंगे तो वह मदद के लिए तैयार हैं. 
 
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा, ‘‘यदि मैं मदद कर सकता हूं, तो मैं एक मध्यस्थ होना पसंद करूंगा.' खान ने ट्रंप के बयान का स्वागत किया और कहा कि यदि अमेरिका सहमत है, तो एक अरब से अधिक लोगों की प्रार्थना उनके साथ होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद इमरान खान अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ से भी आज मुलाकात करेंगे. इस दौरान इमरान खान यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस को भी संबोधित करेंगे. 
 
बता दें, पिछले साल, ट्रंप ने ओसामा बिन लादेन को लेकर इस्लामाबाद पर कई आरोप लगाया था. अमेरिका ने कहा था पाकिस्‍तान को आतंकवाद से लड़ने के लिए हर साल अमेरिका से मोटी रकम मिलती है. लेकिन वह अमेरिका के लिए कुछ भी करने में अबतक नाकाम रहा है. हालांकि अमेरिका के बयान प्रतिक्रिया जताते हुए पाकिस्‍तान ने भी कहा था कि अमेरिका अफगानिस्तान में अपनी नाकामियों के लिए पाकिस्‍तान को 'बलि का बकरा' बना रहा है. 
 
मध्यस्थता के हमेशा खिलाफ रहा है भारत 
हालांकि, ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश की है, लेकिन यह भी गौरतलब है कि भारत हमेशा से कश्मीर समेत तमाम मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता के ही पक्ष में रहा है, और किसी तरह की मध्यस्थता को हमेशा से खारिज किया है. भारत का कहना है कि कश्‍मीर भारत और पाकिस्‍तान का मुद्दा है, इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरुरत नहीं है. वहीं, भारत सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के उस चौंकाने वाले दावे से इनकार किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें कश्मीर पर मध्यस्थता करने के लिए कहा था.
 
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया, ‘‘हमने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रेस को दिये उस बयान को देखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि भारत और पाकिस्तान अनुरोध करते हैं तो वह कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता के लिए तैयार हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से इस तरह का कोई अनुरोध नहीं किया है.' उन्होंने कहा, ‘‘भारत का लगातार यही रुख रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों पर केवल द्विपक्षीय चर्चा होगी. पाकिस्तान के साथ किसी भी बातचीत के लिए सीमापार आतंकवाद पर रोक जरूरी होगी. भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों के समाधान के लिए शिमला समझौता और लाहौर घोषणापत्र का अनुपालन आधार होगा.' 
 
 
बंद है भारत-पाकिस्‍तान के बीच बातचीत 
भारत जनवरी 2016 में पठानकोट में भारतीय वायुसेना के अड्डे पर पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा हमले के बाद से पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत नहीं कर रहा है. भारत का कहना है कि आतंकवाद और वार्ता साथ साथ नहीं चल सकते. इस वर्ष के शुरू में कश्मीर के पुलवामा में पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक आत्मघाती हमलावर द्वारा किये गए विस्फोट में सीआरपीएफ के 40 जवानों के शहीद होने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया. बढ़ते आक्रोश के बीच भारतीय वायुसेना ने एक आतंकवाद निरोधक अभियान चलाते हुए 26 फरवरी को पाकिस्तान के भीतर बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया था.
 
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