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ranchi

  • Aug 8 2019 9:04AM
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रांची : 13 साल बाद जबरन लेना पड़ा फ्लैट का कब्जा, सुविधाओं के नाम पर हुआ धोखा

रांची : 13 साल बाद जबरन लेना पड़ा फ्लैट का कब्जा, सुविधाओं के नाम पर हुआ धोखा
गुलशन अपार्टमेंट के लोगों ने बिल्डर पर लगाये आरोप
रांची : एक आदमी के लिए घर खरीदने का फैसला सबसे अहम होता है. इसके लिए उसे अपनी पूरी जिंदगी की कमाई लगानी पड़ती है. जरा सोचिए, किसी इंसान का घर खरीदने का फैसला ही गलत साबित हो जाये, तो उसका क्या हाल होगा. कुछ ऐसी ही कहानी हिंदपीढ़ी सेंट्रल स्ट्रीट के गुलशन अपार्टमेंट के लोगों की है. 
 
साल 2006 में नक्शा पास होने और बुकिंग के बाद बिल्डर ने इसे पूरा करने में ही 13 साल लगा दिये. इस दौरान एक तरफ लोगों पर बैंक का ब्याज बढ़ता जा रहा था, वहीं दूसरी ओर लाखों रुपये चुकाने के बावजूद  उन्हें किराये के मकान में रहना पड़ रहा था. इतने साल बाद भी  बिल्डर ने जब पजेशन देने से इनकार कर दिया, तो लोगों को जबरन बगैर खिड़की-दरवाजे वाले फ्लैटों पर खुद ही कब्जा करना पड़ा. यहां लिफ्ट-जेनेरेटर तो नदारद थे ही, सुरक्षा के लिए अपार्टमेंट की चहारदीवारी तक नहीं करायी गयी थी. 
 
लोगों ने लगाया बिल्डर पर धमकाने का आरोप
 
इस सोसाइटी में 19 फ्लैट हैं, जिनमें करीब 100 लोग रह रहे हैं. इनका आरोप है कि बिल्डर ने जो सुविधाएं देने का वादा किया था, उसे आज तक पूरा नहीं किया. बेसमेंट में अवैध निर्माण कर दुकानें बना उन्हें जबरन ऊंची कीमत पर बेचा जा रहा. नगर निगम में  शिकायत करने के बाद बिल्डर धमकाता है.
 
ये हैं अपार्टमेंट की प्रमुख समस्याएं
 
सोसाइटी के लोग बताते हैं कि फ्लैट बनते समय 1300 रुपये प्रति वर्ग फीट का वादा हुआ. 13 वर्ष बाद इसकी कीमत बाजार के हिसाब से बढ़ गयी, तो बिल्डर ने लोगों से 400 रुपये प्रति वर्ग फीट अतिरिक्त लिये. दरअसल बिल्डर नहीं चाहता था कि लोग अपने फ्लैट का पजेशन लें, ताकि उसे मौजूदा कीमत पर बेचा जा सके. बुजुर्गों की परेशानी को देखते हुए  सोसाइटी के लोगों ने आपस में पैसा जमा कर लिफ्ट लगवाया, लेकिन बड़े जेनेरेटर के अभाव में यह चल नहीं पाता. आये दिन यह खराब होती रहती है. रेन वाटर हारवेस्टिंग, पानी, सफाई, फायर सेफ्टी, सुरक्षा जैसी सुविधाओं पर भी बिल्डर द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया. सोसाइटी से पानी को खुले में छोड़ा जा रहा है, इससे बारिश के मौसम में बीमारियां फैलने की आशंका है.
 
अपार्टमेंट के लोगों का आरोप गलत है. लगभग सभी कार्य पूरे कर लिए हैं. उनसे सोसाइटी बनाने को कहा जा रहा है, पर वे नहीं बना रहे. पार्टनर के आपसी विवाद के चलते निर्माण लंबा खींच गया. पहले शार्प इंटरप्राइजेज के नाम से एग्रीमेंट था, बाद में शार्प कंस्ट्रक्क्शन के नाम से कंपनी बनाकर प्रॉपर्टी हैंडओवर के प्रयास किये गये. नियमानुसार 10 से 15 प्रतिशत कीमत बढ़ाने का अधिकार है. लागत बढ़ने से कंपनी को काफी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई के लिए ज्यादा राशि ली गयी. आज की तारीख में इसका बाजार भाव काफी ज्यादा है.
अब्दुल समद, पावर होल्डर, गुलशन अपार्टमेंट
 
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