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ranchi

  • Jul 20 2019 12:47AM
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रांची : शिक्षकों के स्थानांतरण में रिजल्ट भी बनेगा आधार

  • 75 से 80 फीसदी वाले को एक व 95 फीसदी से अधिक रिजल्ट वाले को पांच अंक 
  • हाइस्कूल शिक्षक के लिए मैट्रिक व प्लस टू उवि के लिए इंटर रिजल्ट देखा जायेगा 
  • प्राथमिक व मवि के शिक्षकों में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे व आठवीं बोर्ड  का रिजल्ट बनेगा आधार 
रांची  :  राज्य के शिक्षकों के स्थानांतरण में अब विद्यार्थियों का रिजल्ट भी देखा जायेगा. स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग द्वारा तैयार की गयी नियमावली में अब शिक्षक को हर संभव मनपसंद पोस्टिंग देने का प्रयास किया जायेगा. 
 
स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी व नियमावली में तय प्रावधान के अनुरूप होगी. स्थानांतरण में शिक्षकों को प्राथमिकता देने के लिए अलग-अलग प्वाइंट तय किये गये हैं. स्थानांतरण का एक आधार विद्यार्थियों के रिजल्ट को भी बनाया गया है. हाइस्कूल व प्लस टू उच्च विद्यालय में शिक्षक संबंधित विषय का रिजल्ट देखा जायेगा. 
 
प्राथमिक व मध्य विद्यालय शिक्षकों के स्थानांतरण में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे व कक्षा आठवीं बोर्ड के विद्यार्थियों का रिजल्ट देखा जायेगा. इसके लिए अलग-अलग प्वाइंट तय किये गये हैं. 75 से 80 फीसदी रिजल्ट पर एक, 80 से 85 पर दो, 85 से 90 पर तीन 90 से 95 पर चार व 95 से सौ फीसदी रिजल्ट पर पांच अंक दिया जायेगा.  स्थानांतरण के लिए सबसे अधिक अंक उम्र पर दिया जायेगा. 
 
उम्र के आधार पर अधिकतम 58 अंक दिया जायेगा. नियमावली में प्राथमिक शिक्षकों को यथा संभव गृह प्रखंड ट्रांसफर का अवसर दिया जायेगा. जिससे प्राथमिक विद्यालयों में अधिक से अधिक स्थानीय भाषा में पठन-पाठन हो सके. पति-पत्नी का स्थानांतरण एक जिला में किया जा सकता है, पर एक विद्यालय में नहीं. 
 
अविवाहित महिला शिक्षक के मामले में शादी होने के बाद जिला बदलने का एक अवसर दिया जायेगा. एक विद्यालय में स्थानांतरण के लिए एक  से अधिक आवेदन प्राप्त होने पर सबसे पहली प्राथमिकता असाध्य रोग से पीड़ित शिक्षक को दी जायेगी. इसके बाद नि:शक्त, महिला शिक्षक व पुरुष शिक्षक को प्राथमिकता दी जायेगी. 
 
आठ हजार प्राथमिक शिक्षक कर रहे इंतजार  : राज्य में वर्ष 2014-15, 15-16 एवं वर्ष 2019 में प्राथमिक व मध्य विद्यालय में नियुक्त शिक्षक स्थानांतरण नियमावली का इंतजार कर रहे हैं. पिछली शिक्षक नियुक्ति में काफी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति गृह जिला से बाहर हो गयी. नियुक्ति में एक अभ्यर्थी को एक से अधिक जिला में आवेदन का अवसर दिया गया था. 
 
सभी जिलों में एक साथ एक दिन नियुक्ति नहीं होने से, अभ्यर्थी को जहां पहले अवसर मिला, वहां वे नियुक्त हो गये. इस कारण लगभग आठ हजार शिक्षक गृह जिला से बाहर नियुक्त हो गये. शिक्षक गृह जिला में स्थानांतरण का इंतजार कर रहे हैं. उल्लेखनीय है कि प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों का कैडर जिलास्तरीय है. 
 
पांच वर्ष की सेवा अनिवार्यता खत्म करने की मांग
रांची. अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षकों की स्थानांतरण नियमावली में पांच वर्ष की सेवा की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की है. संघ के महासचिव राममूर्ति ठाकुर और प्रदेश प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा है कि पिछली शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया के कारण हजारों शिक्षकों की नियुक्ति गृह जिला से बाहर हो गयी. 
 
इन शिक्षकों की नियुक्ति का अभी पांच वर्ष पूरा नहीं हुआ है. ऐसे में नव नियुक्त शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल नहीं पायेंगे. संघ ने सरकार से स्थानांतरण के लिए पांच वर्ष के सेवा अनुभव को शिथिल करने की मांग की है. संघ ने प्रस्तावित प्रोन्नति नियमावली में स्नातक 
 
प्रशिक्षित व प्रधानाध्यापक पद पर शिक्षकों की प्रोन्नति बंद करने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है. संघ ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की घोषणा की है. 31 जुलाई को राज्य भर के प्राथमिक शिक्षक जिला मुख्यालय के समक्ष धरना देंगे. तीन अगस्त को शिक्षक मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे.
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