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  • Sep 20 2019 9:08AM
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पटना : डेंटल डॉक्टर्स नियुक्ति तक पहुंचेगी जांच की आंच

पटना : डेंटल डॉक्टर्स नियुक्ति तक पहुंचेगी जांच की आंच
पटना : डेंटल डॉक्टर्स की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों में बीपीएससी के सदस्य रहे रामकिशोर सिंह की भूमिका जांच के दायरे में आ सकती है. रामकिशोर उस इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष थे, जिसने नियमों को दरकिनार करते हुए डेंटल डॉक्टरों को इंटरव्यू में काफी कम नंबर दिये थे. इंटरव्यू देने वाले डॉक्टरों का कहना है कि उनका व्यवहार काफी अाक्रामक था. ऐसा लगता था कि जैसे वह इंटरव्यू नहीं, बल्कि रैगिंग में गये हों. इंटरव्यू में शामिल हुए डॉ अजय कुमार  के मुताबिक वह संविदा डाॅक्टरों को कहते थे कि तुम लोगों को तो सरकार नियुक्त कर ही लेगी, हम शून्य नंबर भी देंगे तो क्या होगा? 
 
इसी कारण इंटरव्यू में आठ से 13 साल तक राज्य सरकार के अस्पतालों में संविदा पर काम कर रहे डेंटल डॉक्टरों को 15 अंकों में 0 से लेकर तीन अंक ही दिये गये थे, जिससे 73 वैसे डॉक्टरों का भी चयन नहीं हो सका था, जो राज्य सरकार के अस्पतालों में काम कर रहे हैं. हालांकि, अभी पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर पटना हाइकोर्ट में याचिका दायर होने कारण नहीं पूरी हो सकी है. 
 
जांच की मांग
 
डेंटल डॉक्टर्स संघर्ष मोर्चा के डॉ आयुष सरन ने कहा कि अब जब यह रिपोर्ट सामने आ चुकी है कि किस प्रकार रामकिशोर सिंह फोन पर लाखों की डील करते थे, ऐसे में डेंटल डॉक्टर के इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. हमने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मामले की निष्पक्ष जांच करने की अपील की है.
 
नियुक्ति की प्रक्रिया एकमात्र इंटरव्यू थी
 
राज्य के अस्पतालों में स्थायी डेंटल सर्जन की नियुक्ति का जिम्मा बीपीएससी को दिया गया था. आयोग ने 558 चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन मार्च, 2015 में निकाला. इसमें नियुक्ति की प्रक्रिया एकमात्र इंटरव्यू थी. इसमें 350 संविदा दंत चिकित्सकों समेत कुल 1833 कैंडिडेट शामिल हुए थे. इंटरव्यू के बाद बीपीएससी ने 552 कैंडिडेटों की मेरिट लिस्ट 29 सितंबर, 2018 को जारी की थी, जिसमें 280 संविदा वालों के  नाम थे और 73 संविदा वाले असफल घोषित हुए थे.
 
पास को फेल और फेल को किया गया था पास
 
29 सितंबर, 2018 को रिजल्ट आने के बाद पास को फेल और फेल को पास किया गया था. सफल अभ्यर्थी पल्लवी का रिजल्ट 106 दिनों के बाद यह कहकर रद्द कर दिया गया कि वह ओबीसी की महिला है, जबकि उसका रिजल्ट इबीसी श्रेणी में दे दिया गया था. असफल अभ्यर्थी तूलिका रानी को साढ़े तीन महीने बाद पास कर दिया गया. असफल रहे अविनाश कुमार रिजल्ट के 10 माह बाद पास कर दिया गया. कहा गया कि उसके अनुभव के लिए दिये गये अंकों की गिनती में भूल हुई थी.
 
निगरानी की संदिग्धों वाली सूची में रामकिशोर के कई करीबी, सदस्यों के जवाब पर टिकी आगे की जांच
 
पटना : बिहार लोक सेवा आयोग की 56वीं से 59वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के इंटरव्यू में 25 लाख रुपये लेकर अधिक अंक देने के मामले के आरोपित तत्कालीन सदस्य डॉ रामकिशोर राय के कई करीबियों  पर निगरानी का शिकंजा कसने जा रहा है. 
 
बीपीएससी से जुड़े कई लोग संदिग्धों वाली सूची में हैं. सूत्रों के अनुसार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने  गुरुवार को भी बीपीएससी में संपर्क साधा. बिना काम के भी परिसर में लगातार आने वालों की जानकारी जुटायी गयी. वहीं,   निगरानी के स्पेशल अभियोजन पदाधिकारी विजय कुमार सिन्हा का कहना है कि प्रारंभिक जांच में दो अभियुक्त हैं. 
 
पूरी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा  कि इस मामले में कुल कितने अभियुक्त हैं. निगरानी ब्यूरो 90 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है. निगरानी ने बीपीएससी के जिन पदाधिकारियों को  प्रश्नावली सौंपी है, उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है. तत्काल दस्तावेज  भी उपलब्ध कराने को कहा है. माना जा रहा है 15 दिनों में जवाब और संबंधित  दस्तावेज बीपीएससी से प्राप्त हो जायेंगे. 
 
बीपीएससी के चेयरमैन और सदस्यों के जवाब के बाद जांच में तेजी आ जायेगी. पूर्व सदस्य पर केस हो जाने के  बाद से आयोग के कर्मियों में भी दहशत है. विशेषकर वे अधिकारी और कर्मचारी  लोगों से मिलने-जुलने में कतरा रहे हैं, जो अक्सर डॉ रामकिशोर सिंह के  चैंबर में बेरोक-टोक आते जाते थे. निगरानी के एक अधिकारी ने बताया कि जांच  का दायरा बढ़ाते हुए ऐसे उम्मीदवारों की सूची भी तैयार की जा रही है, जो 56वीं से 59वीं की मुख्य परीक्षा में अच्छे अंक लाये थे, लेकिन इंटरव्यू में मिले मामूली अंकों के कारण असफल रहे. 
 
कोर्ट जारी कर सकता है वारंट : अगर निगरानी प्रारंभिक जांच के आधार पर आवेदन करती है तो कोर्ट दोनों अभियुक्तों रामकिशोर सिंह और परमेश्वर राय के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी कर सकता है. निगरानी को 90 दिनों में इस मामले की चार्जशीट दाखिल करनी है. इस दौरान उसे उनलोगों को भी खोज कर उनके खिलाफ प्रमाण एकत्रित करना है, जो रामकिशोर सिंह के भ्रष्टाचार में शामिल थे.
 
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