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Delhi

  • Jul 12 2019 7:18AM
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मकान मालिक अब नहीं बढ़ा सकेंगे मर्जी से किराया, किरायेदार पर भी नकेल, पढ़ें पूरी खबर

मकान मालिक अब नहीं बढ़ा सकेंगे मर्जी से किराया, किरायेदार पर भी नकेल, पढ़ें पूरी खबर

नयी दिल्ली : मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच होने वाले विवादों को कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मॉडल रेंटल एक्ट का ड्राफ्ट तैयार किया है. इस ड्राफ्ट में मकान मालिक और किरायेदार दोनों के हितों का ख्याल रखा गया है. ड्राफ्ट के तहत मकान मालिक किराये की अवधि के दौरान अपनी मर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे. इसके अलावा, मकान मालिक को घर के जायजा, रिपेयर से जुड़े काम या किसी दूसरे मकसद से आने के लिए 24 घंटों का लिखित नोटिस एडवांस में देना होगा.

एक्ट के ड्राफ्ट में सिक्युरिटी एडवांस पर पाबंदी लगायी गयी है. इसके अनुसार, कोई भी मकान मालिक दो महीने से ज्यादा का किराया सिक्युरिटी एडवांस के रूप में नहीं लेगा. ड्राफ्ट में कहा गया है कि यदि कोई किरायेदार तय समय से ज्यादा मकान में रहता है, तो उसे पहले दो महीने के लिए दोगुना किराया देना होगा. यदि वह दो महीने से ज्यादा समय तक रहता है, तो उसे चार गुना किराया देना होगा. हाउसिंग और अर्बन मामलों के मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट को संबंधित पक्षों के पास सुझावों के लिए भेजा गया है. सुझाव मिलने के बाद एक्ट को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जायेगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पांच जुलाई को अपने बजट भाषण में इस एक्ट की घोषणा की थी. इसके बाद मंत्रालय ने यह ड्राफ्ट तैयार किया है.

मकान मालिक के अधिकार

रेंट एग्रीमेंट खत्म होने के बाद मकान खाली नहीं करने पर चार गुना तक किराया वसूलेंगे 

किरायेदार मकान को दूसरे के हाथों नहीं सौंप सकते 

किरायेदार पर मकान की अच्छे से देखभाल और सुरक्षा करने की जिम्मेदारी होगी 

किरायेदार मकान को नुकसान नहीं पहुंचा सकते, नुकसान होने पर मकान मालिक को बताना होगा

किरायेदार के अधिकार

किराया बढ़ाने के लिए तीन महीने पहले देना होगा नोटिस

रेंट एग्रीमेंट के बीच किराया नहीं बढ़ेगा

अधिकतम दो महीने के किराये से ज्यादा नहीं होगी सिक्युरिटी मनी 

विवाद होने पर मकान मालिक बिजली, पानी जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं रोक पायेंगे

दोनों की जिम्मेदारी
मकान की देखभाल के लिए किरायेदार और मकान मालिक, दोनों ही जिम्मेदार होंगे. अगर मकान मालिक ढांचे में कुछ सुधार कराता है, तो उसे रेनोवेशन का काम खत्म होने के एक महीने बाद किराया बढ़ाने की इजाजत होगी. हालांकि, इसके लिए किरायेदार की सलाह भी ली जायेगी.

कानून लागू करना राज्य की मर्जी

राज्य सरकारों को मर्जी होगी, तो वे यह कानून अपने यहां भी लागू कर सकेंगी. हालांकि, वहां यह कानून पिछली तारीखों से लागू नहीं होगा. दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में वैसे हजारों प्रॉपर्टी मालिकों को कोई राहत नहीं मिलेगी, जिन्हें प्राइम कमर्शियल लोकेशन पर भी पुराने एग्रीमेंट के मुताबिक बेहद कम किराया मिल रहा है.

रेंट कोर्ट में होगा विवादों का फैसला
ड्राफ्ट में रेरा जैसी अथॉरिटी बनाने की सिफारिश की गयी है. यह किराया अथॉरिटी विवादों का निपटारा करेगी. किरायेदार और मकान मालिक को रेंट एग्रीमेंट बनने के बाद इसको अथॉरिटी में जमा करना होगा. एग्रीमेंट में मासिक किराया, अवधि, मकान में आंशिक रिपेयर, बिलों का भुगतान (बिजली, गैस, मेंटिनेंस आदि) जैसे का जिक्र होगा. विवाद होने पर कोई भी पक्ष अथॉरिटी के पास जा सकता है. किरायेदार अगर लगातार दो महीने तक किराया नहीं देता है, तो मालिक रेंट अथॉरिटी के पास जा सकता है. इस अथॉरिटी को रेंट कोर्ट या रेंट ट्रीब्यूनल कहा जा सकता है.

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