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calcutta

  • Jun 16 2019 2:26AM
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डॉक्टरों ने ठुकरायी सीएम की काम पर लौटने की अपील

डॉक्टरों ने ठुकरायी सीएम की काम पर लौटने की अपील

कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को जूनियर डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की. उन्होंने साफ कहा कि हड़ताली जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी. हालांकि उन्होंने देश के कई राज्यों में पूर्व में हालात से निपटने के लिए आवश्यक सेवा संरक्षण कानून (एस्मा) की चर्चा की. उधर, हड़ताली जूनियर डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री की अपील को नामंजूर कर दिया है. उन्होंने कहा कि जूनियर डॉक्टर सीएम से एनआरएस परिसर में बातचीत करना चाहते हैं.

 
गौरतलब है कि राज्य में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल लगातार पांचवें दिन भी जारी रही. मरीजों को भारी परेशानी हो रही है. एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चिकित्सकों पर हमले के खिलाफ जूनियर डॉक्टर मंगलवार के हड़ताल पर हैं. 
 
राज्य सचिवालय नवान्न भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल कर रहे डॉक्टरों को काम पर लौटाने के लिए इससे पहले वर्ष 2008 में ओड़िशा सरकार ने एस्मा जारी की थी. 
 
2009 में गुजरात में भाजपा सरकार ने हड़ताली डॉक्टरों पर एस्मा लगाकर 150 चिकित्सकों को गिरफ्तार किया था. वर्ष 2015 और 2016 में दिल्ली में, वर्ष 2017 में राजस्थान और हरियाणा में तथा 2018 में जम्मू व कश्मीर तथा मणिपुर में हड़ताल कर रहे डॉक्टरों को काम पर लौटाने के लिए वहां की राज्य सरकार ने एस्मा लागू किया था.
 
लेकिन, उनकी सरकार ऐसा नहीं करना चाहती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह एसएसकेएम अस्पताल गयी थीं तब उन्हें आंदोलनकारियों ने धक्का दिया और अप्रिय टिप्पणी की थी. कोई अन्य राज्य होने पर सरकार कार्रवाई करती लेकिन उन्होंने पुलिस को कोई कार्रवाई करने से मना कर दिया. अब भी वह डॉक्टरों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करना चाहतीं.
 
पर, चिकित्सा के अभाव में बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लिहाजा वह चिकित्सकों से आग्रह करती हैं कि वह मरीजों के हित में काम पर लौट आयें. मुख्यमंत्री का कहना था कि सरकार ने चिकित्सकों की सभी मांगें मान ली है. हमला करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया है और घायल डॉक्टर की चिकित्सा का सारा खर्च सरकार ही उठा रही है. अब डॉक्टरों के काम पर न लौटने का कोई कारण नहीं है. 
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर डॉक्टर उनसे बात नहीं करना चाहते तो वह चाहें तो राज्यपाल से बात कर लें. राज्यपाल व उनमें कोई फर्क नहीं है. वह चाहें तो राज्य के मुख्य सचिव या फिर सरकार के किसी मंत्री से बात कर लें, लेकिन वह काम पर लौटें. 
 
चिकित्सकों की मुख्यमंत्री की एनआरएस में आने की मांग के संबंध में ममता बनर्जी का कहना था कि बातचीत के लिए राज्य सचिवालय से बेहतर और कौन सी जगह हो सकती है? वह शुक्रवार को भी जूनियर डॉक्टरों का पांच घंटे तक इंतजार करती रहीं. वह आज भी इंतजार करती रहीं.  इधर, नवान्न में कुछ जूनियर डॉक्टर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे. मुख्यमंत्री ने बताया कि मुलाकात करने वाले जूनियर डॉक्टर काम पर लौटना चाहते हैं. काम पर लौटने वाले सभी डॉक्टरों को पूरी सुुरक्षा दी जायेगी. 
 
डॉक्टरों की हड़ताल के कारण चिकित्सा के अभाव में मारे गये लोगों के परिजनों को मुआवजा देने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर कोई आवेदन करता है तो सरकार इस संबंध में विचार करेगी. इसके अलावा परिजन क्लिनिकल इस्टाब्लिशमेंट कमीशन में भी शिकायत करके मुआवजे की मांग कर सकते हैं.

सीएम ने ईमानदार पहल नहीं की: जूनियर डॉक्टर
 
उधर, प्रदर्शनरत जूनियर डॉक्टरों ने शनिवार को मुख्यमंत्री की अपील को ठुकरा दी और कहा कि इस गतिरोध को दूर करने के लिये सीएम की ओर से कोई ईमानदार कदम नहीं उठाया गया. जूनियर डॉक्टरों ने सुश्री बनर्जी के उस दावे को भी खारिज किया कि उनके कुछ सहकर्मी उनसे मिलने के लिये राज्य सचिवालय गये थे.
 
उन्होंने कहा : संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने जो कुछ भी कहा है उसमें कोई सच्चाई नहीं है. कोई भी जूनियर डॉक्टर उनसे मिलने के लिये नहीं गया था. वह दावा कर रही हैं कि हमलोग समाधान निकालने और बातचीत के खिलाफ हैं. लेकिन हम चाहते हैं कि वह नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज अस्पताल आयें और हमें सुनें तथा बीमार लोगों की सेवा के लिये जरूरी कदम उठायें.
 
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