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  • Jan 14 2020 2:18PM
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शाहीन बाग़: रास्ता खुलवाने पर हाईकोर्ट ने कहा जनहित और क़ानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करे पुलिस

शाहीन बाग़: रास्ता खुलवाने पर हाईकोर्ट ने कहा जनहित और क़ानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करे पुलिस

शाहीन बाग़

AFP

नोएडा-दिल्ली के बाची कालिंदी कुंज का बंद रास्ता खुलवाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वो जनहित और क़ानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उचित कार्रवाई करे.

नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ शाहीन बाग़ में महिलाएं पिछले 15 दिसंबर से धरने पर बैठी हैं. इस कारण नोएडा और दिल्ली का रास्ता बंद है. रास्ता बंद होने के कारण आम लोगों को बहुत परेशानी हो रही है. स्कूल जाने वाले बच्चों को भी दिक़्क़त हो रही है.

लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें रास्ता खुलवाने की अपील की गई थी.

मंगलवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई तो की लेकिन कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया. कोर्ट ने कहा कि पुलिस कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है लेकिन उसे जनहित और क़ानून-व्यवस्था का ध्यान रखना होगा.

कोर्ट ने कोई समय सीमा भी निर्धारित नहीं की है.

सीएए के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा केरल

केरल
Getty Images

केरल सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है.

इससे पहले 31 दिसंबर को केरल विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से अपील की गई थी कि वो इस क़ाननू को वापस ले ले.

मोदी सरकार ने केरल सरकार की अपील को ख़ारिज कर दिया था.

अब केरल सरकार इस क़ानून को रद्द किए जाने की माँग के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सीएए के ख़िलाफ़ अपना विरोध जताया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इस क़ानून को चुनौती देने वाला केरल पहला राज्य है.

केरल सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत याचिका दायर की है.

केरल की याचिका के अनुसार सीएए संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 के अलावा संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन करता है.

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