नल से लेकर ट्रक तक की चुटकियों में मरम्मत, मिलिए देश-दुनिया की इन महिला मैकेनिक से

इन महिलाओं का बतौर मैकेनिक काम करना जितना सुखद है उससे भी ज्यादा सुखद है इनका अनुभव और हिम्मत.
नयी दिल्ली: कोई भी काम छोटा नहीं होता और काम से बड़ा कोई धर्म नहीं होता. एक फिल्म में ये डायलॉग है. आमतौर पर फिल्मी डायलॉग वास्तविक जीवन से मेल नहीं खाते लेकिन, ये संवाद इस स्टोरी में शामिल कुछ महिलाओं पर फिट बैठता है. जिन्होंने ये साबित किया है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता.
इनमें से कोई प्लबंर मैकेनिक हैं तो कोई ट्रक मैकेनिक. कई महिलाएं मोटरबाइक मैकेनिक हैं. इन महिलाओं का बतौर मैकेनिक काम करना जितना सुखद है उससे भी ज्यादा सुखद है इनका अनुभव और हिम्मत.
दक्षिण कोरिया की पहली महिला मैकेनिक
पहली कहानी है आन युंग सोन की. दक्षिण कोरिया की आन युंग सोन एक मैकेनिक हैं. वो दक्षिण कोरिया की पहली महिला मैकेनिक हैं. आन युंग सोन को बचपन से ही औजारों से खेलना पसंद था. एक दिन आन ने इस शौक को पेशा बनाने का फैसला किया. अपनी कंपनी खोली.

उनकी कंपनी में केवल महिलाएं हैं. इनका काम उन घरेलु महिलाओं के लिए राहत भरा है जो घर में किसी पुरुष मैकेनिक के आने से असहज और असुरक्षित महसूस करती थीं.
भारत की पहली ट्रक मैकेनिक शांति देवी
मैकेनिक का पेशा अपनाने में भारत की महिलाएं भी कम नहीं हैं. इनमें पहला नाम शांति देवी का है. शांति देवी भारत की पहली ट्रक मैकेनिक हैं. 2015 में पहली बार ट्रक का ट्रायल बदलते उनकी तस्वीर औऱ वीडियो वायरल हुआ था.

वो बाहरी दिल्ली के हाईवे संख्या 4 में काम करती हैं. बड़ी से बड़ी गाड़ियों का टायर चुटकियों में बदल देती हैं. सबसे स्पेशल बात ये है कि शांति देवी की उम्र तकरीबन 55 साल है.
2 दशक से बाइक मैकेनिक हैं थानी की लता
तीसरी कहानी लता की है. दक्षिण भारत के किसी हिस्से में थानी पेरियाकुलम नाम की जगह में लता मोटरबाइक रिपेयरिंग का काम करती हैं. वो बाइक का टायर बदलने से लेकर कल पुर्जे ठीक करने तक का काम करती है.

काम के बारे में अपना अनुभव बताते हुए लता कहती हैं कि लोग रिपेयरिंग की दुकान देख कर उनके पास आते हैं लेकिन एक महिला को देखकर वापस चले जाते हैं. हालांकि धीरे-धीरे लोग उनके काम की सराहना करने लगे हैं. लता को मैकेनिक का काम करते हुए 2 दशक हो गए.
इंदौर में महिलाएं करती हैं गैराज का संचालन
चौथी कहानी इंदौर की है. मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में एक मोटरबाइक रिपेयरिंग सेंटर है. यहां की सभी कर्मचारी महिलाएं हैं. इसी साल जून महीने में ये गैराज खुला. यहां लड़कियों को मैकेनिक बनने की ट्रेनिंग भी दी जाती है.

लोग बड़ी संख्या में यहां अपनी बाइक ठीक करवाने आते हैं. पहले पहले लोगों के लिए ये आश्चर्य भरा था, लेकिन लोग अब इन लड़कियों के काम की सराहना करने लगे हैं.
मोटरबाइक मैकेनिक हैं 18 साल की हैरियट
पांचवी कहानी आतंक प्रभावित अफ्रीकी मुल्क युगांडा की है. उत्तरी युगांडा में 18 साल की हैरियट मोटरबाइक मैकेनिक का काम करती हैं. उनके परिवार के लोग उन्हें प्यार से लूसी बुलाते हैं. वो बड़ी सफाई से अपना काम करती हैं. हैरियट अपने जिले की पहली महिला मैकेनिक हैं.

अपना अनुभव शेयर करते हुए हैरियट ने बताया कि लोग गैरेज में एक लड़की को देखकर शॉक हो जाते हैं. लेकिन बाद में मुझसे अपनी बाइक ठीक करवाने के लिए कन्विंस हो जाते हैं.
हालांकि, जो लोग मुझसे बाइक ठीक नहीं करवाना चाहते. कहीं और जाना चाहते हैं तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं होती. ये उनकी च्वॉइस है.
मैकेनिक बनने में लड़कियों की बढ़ी है रूचि
बात करें भारत की तो स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना चलाई गई. 2016 से 2020 के बीच मिले आंकड़े बताते हैं कि कुल 73 लाख लाभान्वित लोगों में 40 फीसदी महिलाएं हैं. इनमें भी एक बड़ी संख्या उन महिलाओं या लड़कियों की है जिन्होंने हार्डवेयर का प्रशिक्षण लिया.

मंत्रालय ने बताया कि उद्योग जगत से जुड़ी नई नौकरियों में महिलाओं की सक्रियता बढ़ी है. वेल्डिंग, ऑटोमोबाइल और मैकेनिक के क्षेत्रों में महिलाएं सक्रिय हुई हैं.
Posted By- Suraj Thakur
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