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शरजील इमाम के भड़काऊ भाषण से 1980 के 46 दिन के शटडाउन तक, जानें जेएनयू से जुड़े प्रमुख विवाद

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Sharjeel Imam, Delhi riot case
Sharjeel Imam, Delhi riot case
Photo : twitter

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय यानी जेएनयू के छात्र शरजील इमाम को दिल्ली दंगा मामले में कल यानी मंगलवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने असम से गिरफ्तार किया. शरजील इमाम पर आरोप है कि उसने दिल्ली दंगा की साजिश रची. इस वर्ष फरवरी महीने में जो दंगे हुए थे उस दौरान शरजील पर भड़काऊ और देश विरोधी भाषण देने का आरोप लगा था. शरजील ने असम को देश से अलग करने की बात कही थी.

गौरतलब है कि जेएनयू देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक है और इसकी रैंकिंग हमेशा देश के टॉप 10 विश्वविद्यालय में होती है. जेएनयू की पहचान इसके स्कॉलर हैं. इस विश्वविद्यालय को 2017 में सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय का अवार्ड भी मिल चुका है. यह जेएनयू की खासियत है, लेकिन एक और बात है जिसपर चर्चा की जानी चाहिए, वह यह है कि आखिर जेएनयू के साथ इतने विवाद क्यों जुड़े हैं. जेएनयू की स्थापना 1969 में हुई थी. उस वक्त से अबतक के इतिहास पर गौर करें तो हम पायेंगे कि जेएनयू का तो जैसे विवादों से नाता है.

1981 में 46 दिन के लिए बंद रहा था जेएनयू

जेएनयू में दो वामपंथी छात्र संघ आपस में भिड़ गये थे, जिसके बाद विश्वविद्यालय को इंदिरा गांधी की सरकार ने 46 दिन के लिए बंद कर दिया था. उस वक्त स्थिति सामान्य करने के लिए छात्र संघ के अध्यक्ष राजन जी को हिरासत में लेना पड़ा था.

जेएनयू कैंपस में दो आर्मी आफिसर को पीटा गया

बात साल 2000 की है, जेएनयू कैंपस में मुशायरा का आयोजन किया गया था. आरोप है कि यहां कुछ पाकिस्तानी शायर ऐसी शायरी कर रहे थे जो भारत विरोधी थी. इसी दौरान आर्मी आफिसर ने पाकिस्तान विरोधी नारे लगाये, जिसके बाद छात्रों ने सेना के उन दो अधिकारियों की पिटाई कर दी.

वर्ष 2008 में छात्र संघ चुनाव पर प्रतिबंध लगा

वर्ष 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने जेएनयू के छात्रसंघ चुनाव को स्थगित कर दिया था. लिंगदोह समिति की सिफारिशों को नहीं मानने के कारण यह स्थगन लगा था. बाद में 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव कराने की अनुमति दे दी. साथ ही लिंगदोह समिति की सिफारिशों में कुछ छूट भी दी थी.

2010 में आपरेशन ग्रीन हंट को लेकर विवाद

छत्तीसगढ़ में एक नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 76 जवानों की मौत हुई थी, इस घटना के बाद सरकार ने आपरेशन ग्रीन हंट चलाया था, उस वक्त इस आपरेशन को लेकर जेएनयू में बहुत विवाद हुआ था. कहा जाता है कि नक्सलियों के खिलाफ सरकार के अभियान के विरोध में विश्वविद्यालय कैंपस में बैठक हुई थी. इस बैठक को लेकर छात्रों के समूहों में झड़प हो गयी थी.

2015 में पाठ्‌यक्रम का किया गया विरोध

2015 में नयी सरकार ने जो पाठ्‌यक्रम लाना चाहा, उसका जेएनयू छात्र संघ और अखिल भारतीय छात्र संघ ने विरोध किया. उनका यह कहना था कि यह पाठ्‌यक्रम के भगवाकरण की कोशिश है. विरोध के बाद सरकार ने पाठ्‌यक्रम को वापस ले लिया.

अफजल गुरु की फांसी पर 2016 में हुआ विवाद

वर्ष 2016 में जेएनयू कैंपस में संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की फांसी के खिलाफ कार्यक्रम आयोजित किया गया. कहा जाता है कि इस कार्यक्रम में देश विरोधी नारे भी लगाये गये थे. इसी मामले में जेएनयू के प्रेजिडेंट कन्‍हैया कुमार को अरेस्‍ट भी किया गया था. यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का हिस्सा बना था.

फीस बढ़ोतरी को लेकर उठे विरोध के स्वर

सरकार ने जेएनयू में वर्ष 2019 में फीस बढ़ोतरी कर दी थी. इसका छात्रों ने जमकर विरोध किया और विरोध इतना हुआ कि सरकार को फीस वृद्धि का फैसला वापस लेना पड़ा. इसे गरीब छात्रों के खिलाफ नीति बताया गया था और इस विरोध को जेएनयू शिक्षक संघ का समर्थन भी मिला था.

2020 में हुआ जेएनयू कैंपस पर हमला

जनवरी 2020 में जेएनयू एक बार फिर चर्चा में आया क्योंकि जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष पर जानलेवा हमला हुआ. बताया गया कि लगभग 50 लोग जेएनयू कैंपस में घुस आये और इन्होंने डंडे और लाठियां बरसाना शुरू कर दी. यह लोग नकाब पहने हुए थे.

Posted By : Rajneesh Anand

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