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गलवान घाटी में शहीद हुए जवानों को मरणोपरांत महावीर चक्र, पढ़ें और किन जवानों को मिला सम्मान

Updated at : 25 Jan 2021 9:31 PM (IST)
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गलवान घाटी में शहीद हुए जवानों को मरणोपरांत महावीर चक्र, पढ़ें और किन जवानों को मिला सम्मान

चीन के साथ झड़प के दौरान गलवान घाटी में शहीद हुए जवान कर्नल संतोष बाबू को महावीर चक्र से नवाजा जायेगा. गणतंत्र दिवस के मौके पर वीरता पुरस्कारों का ऐलान हुआ है जिसमें कर्नल संतोष बाबू का नाम शामिल किया गया है.

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चीन के साथ झड़प के दौरान गलवान घाटी में शहीद हुए जवान कर्नल संतोष बाबू को महावीर चक्र से नवाजा जायेगा. गणतंत्र दिवस के मौके पर वीरता पुरस्कारों का ऐलान हुआ है जिसमें कर्नल संतोष बाबू का नाम शामिल किया गया है.

इनके साथ – साथ नायब सूबेदार नादुराम सोरेन, हवलदार के पलानी, हवलदार तेजिंदर सिंह, एनके दीपक सिंह सिपाही गुरतेज सिंह सहित छह सेना के जवानो का नाम शामिल है जिन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया जायेगा. हर साल इस मौके पर वीरता पुरस्कारों का ऐलान होता है. मेजर अनुज सूद जो जम्मू कश्मीर में आतंकियों से लड़ते हुए मई 2020 में शहीद हो गये उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से नवाजा जायेगा.

परमवीर चक्र के बाद महावीर चक्र सेना का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है. कर्नल बाबू के साथ – साथ गलवान घाटी में चीन के सैनिकों के साथ झड़प में शामिल सेना के जवानों को भी गेलेंट्री अवार्ड से नवाजा जाना है. सेना ने उन सभी जवानों को सम्मानित करने की सिफारिश की है जो इस झड़प में शामिल थे.

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लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल में चीन के साथ लगातार झड़प जारी है. सेना के जवान चीन के सैनिकों को खदेड़ते रहते हैं. इन जवानों को सम्मान देकर उनका हौसला बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद हुए ASI मोहन लाल को भी इस साल गैलेंट्री अवॉर्ड से नवाजा जायेगा. मोहन लाल ने IED लगी कार को पहचाना था और गोलीबारी की थी.

15 जून की रात को भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प की घटना हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गये थे. उस घटना में चीन को भी भारी नुकसान हुआ था, लेकिन ड्रैगन ने अपने नुकसान को दुनिया के सामने नहीं लाया. उस घटना के बाद से लद्दाख में दोनों देशों के बीच विवाद और भी गहरा गया था.

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उस वक्त कर्नल संतोष बाबू ही वहां के कमांडिंग ऑफिसर थे. चीनी सेना से 16 बिहार रेजिमेंट के जवान भिड़ गए थे, चीनी सेना के जवानों को भारतीय जमीन में घुसने रोका और वापस खदेड़ दिया था. कई दशकों के बीच भारत और चीन के बीच सीमा पर इस तरह की हिंसा हुई और जवानों की जान गई. पिछले साल अप्रैल से शुरू हुआ विवाद आज तक जारी है.

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