सार्स-कोव-2 वायरस के डेल्टा और ओमिक्रॉन के म्यूटेशन से बना नया वेरिएंट डेल्मिक्रॉन, जानें कितना खतरनाक है
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jan 2022 7:57 AM
कोरोना महामारी फैलाने वाले सार्स कोव-2 वायरस के इन तीनों वेरिएंट (डेल्टा, ओमिक्रॉन और डेल्मिक्रॉन) पर अभी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की विज्ञान एजेंसी कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (सीएसआईआरओ) ने शोध किया है, जिससे यह निष्कर्ष सामने आया है.
नई दिल्ली : देश दुनिया में पिछले दो सालों से कोरोना महामारी के फैलाने वाले सार्स-कोव-2 वायरस के डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट के म्यूटेशन से एक नए वेरिएंट डेल्मिक्रॉन की उत्पत्ति का पता चला है. कोरोना महामारी फैलाने वाले वायरस के डेल्टा, ओमिक्रॉन और डेल्मिक्रॉन पर किए गए शोध से पता चला है कि देश में फिलहाल वायरस के तीसरे नए वेरिएंट डेल्मिक्रॉन का खतरा नहीं के बराबर है और यह बहुत कम हो गया है. कोरोना महामारी फैलाने वाले सार्स कोव-2 वायरस के इन तीनों वेरिएंट (डेल्टा, ओमिक्रॉन और डेल्मिक्रॉन) पर अभी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया की विज्ञान एजेंसी कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (सीएसआईआरओ) ने शोध किया है, जिससे यह निष्कर्ष सामने आया है.
इस शोध का नेतृत्व करने वाले सीएसआईआरओ के कोविड-19 प्रोजेक्ट लीडर प्रोफेसर एसएस वासन ने कहा कि हमने 1 नवंबर 2021 तक दुनिया के सबसे बड़े रिपॉजिटरी जीआईएसएआईडी में 4.2 मिलियन कोरोना वायरस जीनोम सीक्वेंस देखे. इसमें 3688 रिकॉर्ड थे, जिनमें एन501वाई के साथ-साथ पी681आर म्यूटेशन भी थे. यह सभी रिपोर्ट भारत सहित 65 देशों से ली गई थीं, लेकिन फ्रांस, तुर्की और अमेरिका में इन दोनों म्यूटेशन वाले वैरिएंट फैल नहीं पाए.
विशेषज्ञों का मानना है कि डेल्मिक्रॉन नामक स्ट्रेन सही मायने में अमेरिका और यूरोप में कोरोना की सुनामी लाने के लिए जिम्मेदार है. डेल्मिक्रॉन की उत्पत्ति मुख्य रूप से डेल्टा और ओमिक्रॉन के मिलने से हुई है. यह पश्चिमी देशों में तेजी से फैल रहे कोविड-19 का डबल वैरिएंट है. हालांकि, इस नए शोध से पता चला है कि डेल्टा के प्रसार के लिए जिम्मेदार ‘पी681आर’ म्यूटेशन, ‘एन501वाई’ म्यूटेशन के साथ जुड़ गया है, जो ओमिक्रॉन, अल्फा, बीटा और गामा में मौजूद है. ‘पी681आर’ म्यूटेशन और ‘एन501वाई’ म्यूटेशन का सम्मिश्रण संक्रमित होकर फैलता नहीं है.
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चौंकाने वाली बात यह है कि सार्स-कोव-2 के नए वैरिएंट डेल्मिक्रॉन को लेकर लोगों में खौफ बना हुआ था. 22 दिसंबर को दिल्ली में एक 23 वर्षीय महिला ने कोविड के नए वेरिएंट डेल्मिक्रॉ के बारे में पढ़ने के बाद जान देने की कोशिश की थी. उसके पिता (जो शहर के एक अस्पताल में जाने-माने डॉक्टर थे) डेल्टा के प्रकोप के दौरान लगभग अपनी जान गंवा चुके थे. डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट के म्यूटेशन से बने इस नए स्ट्रेन ने उसे इतना डरा दिया कि वह अपने माता-पिता को फिर से खतरे में देखने के बजाय अपना जीवन समाप्त करना चाहती थी.
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