समलैंगिक विवाह के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जमीयत उलेमा-ए-हिंद, पक्षकार बनाने की मांग

Updated:
विज्ञापन
WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

जमीयत उलमा-ए-हिंद ने अपनी याचिका में कहा, समलैंगिक विवाह की अवधारणा परिवार व्यवस्था पर हमला करेगी. मुसलमानों में विवाह एक पवित्र अनुबंध है. जो एक जैविक पुरुष और एक जैविक महिला के मिलन की ओर ले जाता है. समलैंगिक विवाह सामाजिक व्यवस्था के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है.

विज्ञापन

समलैंगिक विवाह के विरोध में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस मामले में पक्षकार बनाने का अनुरोध किया है. मालूम हो इस मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है.

विज्ञापन

समलैंगिक विवाह की अवधारणा परिवार व्यवस्था पर हमला

जमीयत उलमा-ए-हिंद ने अपनी याचिका में कहा, समलैंगिक विवाह की अवधारणा परिवार व्यवस्था पर हमला करेगी. मुसलमानों में विवाह एक पवित्र अनुबंध है. जो एक जैविक पुरुष और एक जैविक महिला के मिलन की ओर ले जाता है. समलैंगिक विवाह सामाजिक व्यवस्था के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है.

अल्पसंख्यक समूहों ने समलैंगिक विवाह का विरोध किया

कुछ अल्पसंख्यक समूहों ने प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर समलैंगिक विवाह का विरोध जताने के लिए अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला दिया है. एक अन्य निकाय ‘कम्युनियन ऑफ चर्च इन इंडिया’ ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे एक पत्र में इसी तरह के विचार व्यक्त किए हैं.

Also Read: RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने राहुल गांधी को दी नसीहत, समलैंगिक विवाह पर कह दी बड़ी बात

केंद्र सरकार ने भी समलैंगिक विवाह का किया विरोध

केंद्र ने भी सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग करने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा है कि यह ‘पर्सनल लॉ’ और स्वीकृत सामाजिक मूल्यों के नाजुक संतुलन को तहस-नहस करने के साथ पूर्ण विनाश का कारण बनेगा.

जैन गुरु ने भी समलैंगिक का विरोध किया

जैन गुरु आचार्य लोकेश ने कहा कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मंजूरी भारत के प्राचीन मूल्यों पर आधारित समाज के मूल्यों के खिलाफ होगी. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में, विशेष रूप से जैनियों के बीच, विवाह वंश के विस्तार के लिए आधार है. पसमांदा (पिछड़े) मुस्लिम समूह के परवेज हनीफ ने भी इन समूहों के समान विचार व्यक्त किए हैं.

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola