फेक न्यूज पर वार : कोरोना को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाये जा रहे हैं भ्रम, जानें क्या है सच्चाई

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 25 Mar 2020 5:42 AM

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कोरोना वायरस से बचाव को लेकर सोशल मीडिया पर किये जा रहे दावे लोगों को भम्र में डाल रहे हैं. ऐसे में कई लोग कन्फ्यूज हैं कि क्या सही है और क्या गलत. लोगों में उभरी ऐसी ही कुछ गलतफहमियों को अमेरिका की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ मैरिलैंड’ के चीफ ऑफ इंफेक्शियस डिजीज, फहीम यूनुस ने अपने ट्विटर हैंडल @FaheemYounus के जरिये दूर किया है.

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कोरोना वायरस से बचाव को लेकर सोशल मीडिया पर किये जा रहे दावे लोगों को भम्र में डाल रहे हैं. ऐसे में कई लोग कन्फ्यूज हैं कि क्या सही है और क्या गलत. लोगों में उभरी ऐसी ही कुछ गलतफहमियों को अमेरिका की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ मैरिलैंड’ के चीफ ऑफ इंफेक्शियस डिजीज, फहीम यूनुस ने अपने ट्विटर हैंडल @FaheemYounus के जरिये दूर किया है. आइए जानें सोशल मीडिया पर किये जा रहे दावे और उसकी सच्चाई…

दावा

घर आते ही कपड़े बदलें और अच्छी तरह नहा लें. वरना, कपड़ों के साथ बाहर से कोरोना का संक्रमण भी आपके घर में आ रहे हैं.

सच्चाई

साफ-सफाई जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर लोगों को डराएं नहीं. बस हाथ धोते रहें, लोगों से एक मीटर की दूरी बना कर रखें. भीड़भाड़ में हरगिज न जाएं.

दावा

मेरे पास मैसेज आया है कि लहसुन या नींबू के साथ गर्म पानी और प्याज का इस्तेमाल करें, तो कोरोना को रोका जा सकता है या ठीक किया जा सकता है.

सच्चाई

नहीं. इसका कोई साइंटिफिक टेस्ट अबतक नहीं किया गया है. ऐसे मैसेज शेयर न करें, इससे भ्रम पैदा हो सकता है.

दावा

देश कई राज्यों में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गयी है, क्या इसका मतलब लोगों की जिंदगी खतरे में है.

सच्चाई

बिलकुल नहीं. सरकार ने यह कदम कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए उठाया है. ऐसे कदमों से हम बीमारी को हरा सकते हैं और जिंदगियां बचा सकते हैं.

दावा

चीन और इटली के डॉक्टरों के मैसेज सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. तो क्या हम उनपर भी भरोसा न करें.

सच्चाई

नहीं. डॉक्टर्स अपनी रिसर्च को साइंटिफिक जर्नल में छपवाते हैं, सोशल मीडिया पर नहीं. ढेरों बेहतर रिसर्च पहले ही छप चुकी हैं. सोशल मीडिया के झांसे में न आएं.

दावा

शिपिंग पैकेज, गैस पंप, शॉपिंग कार्ट्स और एटीएम को नहीं छुएं, वरना आपकी मौत हो जायेगी.

सच्चाई

कोरोना वायरस को जिंदा रहने के लिए ऐसी सतहें नहीं चाहिए, इसलिए ऐसी चीजों से कोई खतरा नहीं है. बस, हाथ धोते रहें और सतर्क रहें.

दावा

टेकआउट फूड, चाइनीज फूड या फूड की पैकेजिंग ऑर्डर करने से संक्रमण का खतरा है.

सच्चाई

कोरोना फ्लू की तरह का एक ड्रॉपलेट संबंधित संक्रमण है. फूड से पैदा हुआ संक्रमण नहीं है. टेकआउट फूड से कोई खतरा नहीं है.

दावा

अगर 20 मिनट तक सौना बाथ लेते हैं, तो 90% वायरस मारे जाते हैं, कोरोना भी.

सच्चाई

इस दावे को साबित करने वाले कोई साइंटिफिक ट्रायल नहीं हुए हैं. उलटे सौना लेने से न्यूमोनिया जैसी दूसरी बीमारियां आ सकती हैं.

दावा

अगर पहले से ही हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसीन ले लेंगे, तो कोरोना की रोकथाम की जा सकती है.

सच्चाई

ये ऐसी दवाइयां हैं, जो गिने-चुने कोरोना के मरीजों को दी जाती हैं. उलटे इनसे हार्ट की शिकायतें हो सकती हैं. दूसरे साइड इफेक्ट्स भी संभव है.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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